
... Read More
Written By: Anshumala | Published : November 23, 2018 2:42 PM IST
क्या आप भी माहवारी के बैगर क्रैंप्स आदि लक्षणों को महसूस करती हैं? © Shutterstock
थकान, मूड स्विंग, पेट फूलना, किसी चीज के लिए तलब महसूस होना और मरोड़ वाला दर्द, क्रैंप्स जैसे माहवारी (Menstruation) से पहले सामने आने वाले लक्षण महसूस होते हैं, मगर ब्लीडिंग शुरू नहीं होती है तो ऐसा किसी अन्य मेडिकल कारणों से भी हो सकता है। फोर्टिस लाफेम, नई दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट-ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. रेखा गुलेरिया यहां आपको उन कारणों के बारे में बता रही हैं, जिनकी वजह से आप माहवारी के बगैर ही उसके लक्षणों को महसूस करती हैं।
नहीं होगा दोबारा गर्भपात, जब आजमाएंगी ये चमत्कारी उपाय
अंडोत्सर्ग से सम्बंधित हार्मोनल बदलाव मस्तिष्क पर जिस तरह से प्रभाव डालते हैं वैसे ही अन्य मेडिकल स्थितियों में भी हो सकता है। इन परिस्थितियों में भी पीरियड की तरह मूड स्विंग महसूस हो सकता है लेकिन इसका संबंध अंडोत्सर्ग से नहीं होता है। यदि आपका मासिक फ्लो तीन माह से अधिक समय तक रुका रह जाए तो आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
गर्भधारण
अगर आपने असुरक्षित यौन संबंध बनाया है और अगले 72 घंटों में गर्भनिरोधक दवा लेना भूल गई हैं, तो आपको घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट किट लाकर टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के कुछ शुरुआती लक्षण तकरीबन माहवारी के लक्षणों जैसे ही होते हैं जैसे कि ब्रेस्ट का नाजुक होना, थकान, मरोड़, मूड स्विंग आदि।
समयपूर्व प्रसव का जोखिम घटाता है ओमेगा-3 फैटी एसिड
थायरॉइड
थायरॉइड ग्रंथि शरीर के तमाम कार्यकलापों को देखती है, जिसमें माहवारी चक्र भी शामिल है। अगर किसी कारण से इस ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन पर नियंत्रण खत्म हो जाता है तो स्वास्थ्य पर इसका विपरीत असर पड़ता है जैसे कि डिप्रेशन या वजन में बढोत्तरी। कुछ लोगों के साथ ऐसा भी हो सकता है कि उनको महीनों तक माहवारी न आए और फिर भी इसके लक्षण महसूस हों।
तनामें में भी बिना ब्लीडिंग के ही माहवारी के लक्षण महसूस हो सकते हैं। © Shutterstock
तनाव
तनाव से कॉर्टिसोल स्तर बढ़ जाता है जो शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ सकता है। इस हालत में भी बिना ब्लीडिंग के ही माहवारी के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
गर्भनिरोधक गोली की जगह खाएं ये एक चीज, नहीं होंगी प्रेगनेंट
पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस)
पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जिसमें एंड्रोजन की मात्रा बढ़ने से अंडाशय का फंक्शन प्रभावित होता है। बालों की ग्रोथ बढ़ जाती है। वजन बढ़ने लगता है और इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है। पीसीओएस की वजह से अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया बाधित हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप पीरियड आने में देरी होती है और मरोड़ वाला दर्द उठता है। मूड स्विंग होता है।
एंडोमेट्रियोसिस
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें एंडोमेट्रियम प्राथमिक तौर पर गर्भाशय के अंदरूनी दीवार पर और फिर बाहरी दीवार तक विकसित होने लगता है। आमतौर पर यह असामान्य विकास अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय के आस-पास के टिशू और बेहद कम मामलों में शरीर के अन्य हिस्सों में भी बढ़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में 10.8 मिलियन महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं। इसकी वजह से गम्भीर मरोड़ वाला दर्द, पेट फूलने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण सामने आते हैं।
गर्भाशय का कैंसर
हार्मोन उत्पादित करने वाले सिस्ट कई बार अनियमित पीरियड का कारण बन सकता है। बारम्बारता बढ़ने पर बांझपन भी हो सकता है, मगर ऐसा हमेशा नहीं होता है।