सॉफ्ट ड्रिंक्स पिए बिना नहीं रह पातीं, मां बनने की ख्वाहिश रह सकती है अधूरी

सोडा और गैस युक्त अन्य तरह के सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन का असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता को काफी हद तक प्रभावित करता है।

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Written By: Anshumala | Published : June 29, 2018 7:23 PM IST

इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि डायट का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। हम जो खाते-पीते हैं, उसका गहरा असर न केवल हमारी फिजिकल हेल्थ पर पड़ता है, बल्कि गर्भधारण की क्षमता पर भी उसका सीधा प्रभाव पड़ता है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल की गायनकोलॉजिस्ट डॉ.निताशा गुप्ता का कहना है कि सोडा और गैस युक्त अन्य तरह के सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन का असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता को काफी हद तक प्रभावित करता है। एस्परटाइम एक आर्टिफिशल स्वीटनर है, जिसमें एंडोक्राइन ग्लैंड्स को डिस्टर्ब करने वाले गुण होते हैं। यह हार्मोन्स में असंतुलन पैदा करता है, जिसके चलते महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कतें पेश आती हैं। लगभग सभी सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा युक्त पेय पदार्थों में इस तरह के स्वीटनर्स पाए जाते हैं, जो उनके स्वाद में मीठापन लाते हैं। इन पेय पदार्थों का जरूरत से ज्यादा सेवन हार्मोन्स में असंतुलन और अस्थिरता पैदा करता है, जिसके चलते ओव्यूलेटरी डिसऑर्डर होने के अलावा समय से पहले माहवारी के गंभीर लक्षण भी महिलाओं में नजर आने लगते हैं।

एस्परटाइम से होती हैं कई समस्याएं

एस्परटाइम स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से जुड़ा होता है। इनमें बांझपन, कुरूपता और गर्भपात जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। फेनिलएलनिन और एस्पर्टिक एसिड दो ऐसे अमीनो अम्ल हैं, जो एस्परटाइम में पाए जाते हैं और अन्य अमीनो एसिड्स के साथ इनके सेवन को नेचुरल और हानिरहित माना जाता है। लेकिन जब इन्हें एक साथ न लेकर के अलग-अलग इनका सेवन किया जाता है, तो ये फ्री-रैडिकल्स के निर्माण को बढ़ावा देते हैं, जिससे कोशिकाएं मरने लगती हैं। अगर अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए, तो शुक्राणु और अंडाणु बनाने वाली कोशिकाओं के मरने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है इसलिए कई डॉक्टर्स और विशेषज्ञ प्रजनन क्षमता और स्वास्थ्य पर असर डालने वाली ऐसी किसी भी चीज का सेवन न करने की सलाह देते हैं, जो शरीर में फ्री-रैडिकल्स के निर्माण को बढ़ावा देने में मदद करते हों।

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प्रजनन क्षमता हो सकती है प्रभावित

इस तरह के शुगर और गैस युक्त पेय पदार्थ रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं, जिसके चलते वजन बढ़ने और हारमोन्स के असंतुलन जैसी दिक्कतें पैदा होती हैं, जिसका प्रजनन क्षमता पर भी गंभीर असर पड़ता है। खासकर महिलाओं के इससे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना रहती है, क्योंकि कई महिलाएं हेल्दी फूड को छोड़कर इन चीजों का ज्यादा सेवन करने लगती हैं, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी पैदा हो जाती है, जिसे अनहेल्दी प्रेग्नेंसी, भ्रूण के सही तरीके से विकसित न हो पाने और गर्भपात जैसी समस्याओं के पैदा होने का खतरा बना रहता है।

डॉ. निताशा गुप्ता का कहना है कि ज्यादातर सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन और फ्रूक्टोज पाए जाते हैं, जिनके चलते महिलाओं में ओव्यूलेटरी डिसऑर्डर और बांझपन का खतरा बढ़ने की संभावना बनी रहती है। कैफीन रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण बनाता है, जिसके चलते गर्भाशय में ब्लड का फ्लो कम हो जाता है। इसके चलते माहवारी के दौरान ब्लीडिंग कम होती है और उसकी अवधि भी कम या छोटी हो जाती है। कैफीन, एस्परटेम और फ्रूक्टोज का कॉम्बिनेशन सेक्स हार्मोन्स और हार्मोन रिसेप्टर्स को प्रभावित करता है, जिससे अंतः इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अपनी डायट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। खासतौर से तब, जब आप मां बनने की प्लानिंग कर रही हैं। गैस युक्त ड्रिंक्स का सेवन कम करने से आपको इसमें काफी मदद मिल सकती है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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