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विश्‍व किडनी दिवस : क्रोनिक किडनी डिजीज में बहुत जरूरी है खानपान का ध्‍यान रखना, ये डायट कर सकते हैं फॉलो

अधिकांश मरीजों को नमक कम लेने की सलाह दी जाती है, कुछ लोग नमक के बदले सेंधा नमक खाने लगते हैं, यह भी सही नहीं है। ©Shutterstock.

अधिकांश मरीजों को नमक कम लेने की सलाह दी जाती है, कुछ लोग नमक के बदले सेंधा नमक खाने लगते हैं, यह भी सही नहीं है।

Written by Yogita Yadav |Published : March 13, 2019 1:43 PM IST

किडनी हमारे शरीर का महत्‍वपूर्ण अंग है। खराब लाइफ स्‍टाइल या किसी दवा के दुष्‍प्रभाव स्‍वरूप कई बार किडनी में कुछ समस्‍याएं आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में बहुत संभल कर रहने की जरूरत होती है। असल में किडनी शरीर में ए‍कत्र हुए अधिक पानी, नमक और अन्य क्षार तत्‍व को पेशाब द्वारा दूर करके शरीर में इन पदार्थो का संतुलन बनाने का काम करती है। किडनी फेल होने पर इस काम में बाधा पहुंचती है।

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यह होता है नुकसान

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किडनी फेल होने पर मरीजों में पानी, नमक, पोटैशियमयुक्त खाध्य पदार्थ आदि सामान्य मात्र में लेने पर भी कई बार गंभीर समस्या करने लगते हैं। किडनी फेल्योर के मरीजों में कम कार्य सक्षम किडनी को अधिक बोझ से बचाने के लिए तथा शरीर में पानी, नमक और क्षारयुक्त पदार्थ की उचित मात्रा बनाये रखने के लिये आहार में जरुरी परिवर्तन करना जरूरी हो जाता है।

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हेल्‍दी डायट का लाभ

सावधानी पूर्वक हेल्‍दी डायट लेने से कमजोर हो रही किडनी पर बोझ कम पड़ता है, जिससे उनकी लाइफ और बढ़ जाती है। अगर इस तरह की डायट को सही तरह से फॉलो किया जाए डायलिसिस की जरूरत को भी कम किया जा सकता है।

यह डायट कर सकते हैं फॉलो

सीमित मात्रा में पिएं पानी और अन्‍य तरल पदार्थ : ऐसी स्थिति में डॉक्‍टर पानी और तरल पदार्थ कम लेने की सलाह देते हैं। जिससे किडनी पर उन्‍हें बाहर करने का अतिरिक्‍त बोझ नहीं पड़ता। किडनी मरीजों को रोज अपना वजन मापने की सलाह दी जाती है, ताकि जिस दिन वजन अधिक हो, तो समझ लेना चाहिए कि तरल पदार्थ में बॉडी में ज्‍यादा हैं।

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कार्बोहाइड्रेटस: शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैलोरी मिले उसके लिए अनाज एवं दालों के साथ (यदि डायाबिटीज नहीं हो, तो) चीनी अथवा ग्लूकोज की अधिक मात्रा वाले आहार का उपयोग किया जा सकता है।

प्रोटीन : दूध, दालों, अनाज, अण्डे में ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। जब डायालिसिस की जरूरत नहीं हो, उस अवस्था के किडनी फेल्योर के मरीजों को थोड़ा कम प्रोटीन (0.8 ग्राम/किलोग्राम शरीर के वजन के बराबर) लेने की सलाह दी जाती है। जबकि नियमित हीमोडायालिसिस एवं सी.ए.पी.डी. (C.A.P.D) कराने वाले मरीजों में ज्यादा प्रोटीन लेना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि भोजन में ज्यादा प्रोटीन नहीं दिया जाये, तो शरीर में प्रोटीन कम हो जाता है, जो हानिकारक है।

वसा : किडनी खराब या बीमार होने की स्थिति में वसा यानी घी,  मक्‍खन आदि कम मात्रा में लेनी चाहिए। परन्तु इनको बिलकुल बंद नहीं करना चाहिए। तेलों में मूंगफली का तेल या सोयाबीन का तेल फायदेमंद रहता है, फिर भी उन्हें कम मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।

नमक: अधिकांश मरीजों को नमक कम लेने की सलाह दी जाती है। उपर से नमक नहीं छिड़कना चाहिये। खाने का सोडा - बेकिंग पाउडर वाली वस्तुएं कम लेनी चाहिए अथवा नहीं लेना चाहिए। कुछ लोग नमक के बदले सेंधा नमक खाने लगते हैं, यह भी सही नहीं है।

अनाज: अनाज में चावल या उससे बने पोहा (चिउड़ा), मुरी (फरही) जैसी चीजों का उपयोग करना चाहिए। हर रोज एक ही अनाज लेने की जगह गेहूं, चावल, पोहा, साबूदाना, सूजी, मैदा, ताजा मक्का, कार्नफ्लेक्स इत्यादि चीजें ली जाती सकती हैं। ज्वार, मकई तथा बाजरा कम लेना चाहिए।

दालें : अलग-अलग तरह की दालें सही मात्रा में ली जा सकती हैं, जिससे खाने में विविधता बनी रहती है। दाल के साथ पानी की मात्रा कम लेनी चाहिए। जहाँ तक हो सके, दाल गाढ़ी लेनी चाहिए। दाल में से पोटेशियम कम करने के लिए उसे ज्यादा पानी से धोने के बाद गरम पानी में भिगो कर उस पानी को फेंक देना चाहिए। ज्यादा पानी में दाल को उबालने के बाद पानी को फेंक कर स्वादानुसार बनाना चाहिए। दाल और चावल के स्थान पर उनसे बनी खिचडी, डोसा वगैरह भी खाये जा सकते हैं।

साग-सब्जी : कम पोटेशियम वाली साग-सब्‍जी बिना किसी परेशानी के उपयोग की जा सकती है।

फल : फलों में भी कम पोटेशियम वाले फल जैसे सेब, पपीता, अमरुद, बेर आदि  दिन में केवल एक बार ही लेने चाहिए। डायालिसिस वाले दिन डायालिसिस से पहले कोई भी एक फल खाया जा सकता है। नारियल का पानी या फलों का रस नहीं लेना चाहिए।

दूध और दुग्‍ध उत्‍पाद : हर रोज 300 से 350 मिली लीटर दूध या दूध से बनी अन्य चीजें जैसे खीर, आइसक्रीम, दही, मट्ठा इत्यादि ले सकते हैं। साथ ही पानी कम लेने के निर्देश को ध्यान में रखते हुए मट्ठा कम मात्रा में लेना चाहिए।

शीतलपेय: पेप्सी, फेंटा, फ्रूटी जैसे शीतल पेय नहीं लेने चाहिए। फलों का रस एवं नारियल का पानी भी नहीं लेना चाहिए।

ड्राईफ्रूट्स : ड्राईफ्रूट्स और नट्स में मूंगफली, तिल, हरा या सूखा नारियल नहीं लेना चाहिए।

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