
... Read More
Written By: Anshumala | Updated : August 2, 2021 3:38 PM IST
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान हल्दी के सेवन के लाभ....
Health Benefits Of Turmeric While Breastfeeding: पूरी दुनिया में 1 से 7 अगस्त तक 'वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2021' (World Breast Feeding Week 2021) सेलिब्रेट किया जाता है। हर साल, स्तनपान सप्ताह (Breastfeeding week 2021 Theme) की एक थीम चुनी जाती है। इस बार की थीम 'प्रोटेक्ट ब्रेस्टफीडिंग: एक साझा जिम्मेदारी' (Protect Breastfeeding: A Shared Responsibility) है। स्तनपान को प्रोत्साहित करने, इसे बढ़ावा देने और दुनिया भर के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए 'विश्व स्तनपान सप्ताह 2021' मनाया जाता है। जन्म के बाद से लेकर कम से कम 6 महीने तक एक शिशु का मुख्य आहार मां का दूध होता है। एक्सपर्ट के अनुसार, शिशु को 1 साल तक मां का दूध पिलाने से ना सिर्फ पोषक तत्वों की जरूरत पूरी होती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी बच्चा हेल्दी बनता है। जब आप अपने शिशु का अपना दूध पिलाती हैं, तो आपको भी अपनी सेहत के साथ-साथ उसकी सेहत का ख्याल रखने की जरूरत होती है। यदि आपका खानपान गलत होगा, तो उसका नेगेटिव असर शिशु की सेहत पर होगा।
आप जितना अपनी डाइट में पोषक तत्वों को शामिल करेंगी, उतना ही आपके बच्चे को दूध के जरिए न्यूट्रिएंट्स प्राप्त होंगे। आप चाहती हैं कि आपके बच्चे की सेहत अच्छी बनी रहे, तो आप अपनी डाइट में हल्दी को अधिक शामिल करें। हल्दी के सेवन से स्तनपान कराने वाली महिलाओं को फायदा (Turmeric During Breastfeeding) होता है। हल्दी में मौजूद पोषक तत्व दूध पिलाने के दौरान आपको कई तरह के इंफेक्शन से बचा सकते हैं, जिससे शिशु की सेहत पर भी कोई नकारात्मक असर नहीं होगा। जानें, ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं के लिए हल्दी का सेवन किस तरह से पहुंचा सकता है सेहत लाभ (Haldi Benefits during Breastfeeding)....
हल्दी इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए जानी जाती है। कई तरह के इंफेक्शन से शरीर को बचाती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीवायरल गुण मौजूद होने के कारण हल्दी उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होती है, जो अपने शिशु को स्तनपान (Haldi Benefits during Breastfeeding in Hindi) कराती हैं। आपको खांसी, सर्दी, जुकाम, फ्लू, बुखार जैसी समस्याएं भी नहीं होंगी। यदि आप हल्दी का सेवन करेंगी, तो शिशु भी इन समस्याओं से बचा रहेगा।
दूध पिलाते समय यदि आपका खानपान गड़बड़ होगा, तो शिशु पर भी इसका असर होगा। उसे पेट की समस्या हो सकती है। यदि आप हल्दी का सेवन करती हैं, तो एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होने के कारण यह पेट में गुड बैक्टीरिया के लेवल को बनाए रखता है साथ ही कीटाणुओं का नाश करता है। उल्टी, डायरिया, कब्ज, एसिडिटी, बदहजमी, अपच से दूर रखती है हल्दी। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में कई बार ब्लोटिंग की समस्या हो जाती है, हल्दी ब्लोटिंग से भी बचाती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, हल्दी में मौजूद करक्युमिन में कुछ ऐसी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो कई तरह की डाइजेस्टिव डिसऑर्डर जिससे पोस्टपार्टम महिलाएं परेशान रहती हैं जैसे कब्ज, गैस्ट्रिक रिफ्लक्स आदि को दूर करती हैं।
कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद लिवर की समस्या भी हो सकती है। हल्दीमें मौजूद तत्व लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं।साथ ही यह एंजाइम्स के निर्माण को भी बढ़ाते हैं। एंजाइम्स लिवर के खून को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं। हल्दी से ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं का ब्लड सर्कुलेशन भी सही बना रहता है।
डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं में ज्वाइंट और कमर में दर्द की समस्या परेशान करती है। इसका मुख्य कारण है इंफ्लेमेशन और सबसे कॉमन इंफ्लेमेशन की समस्या है इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस। हल्दी में मौजूद करक्युमिन में बेहद ही स्ट्रॉन्ग एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों और कमर के दर्द से राहत दिलाते हैं। साथ ही ऑस्टियोअर्थराइटिस की समस्या से भी बचाए रख सकते हैं।