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Why Vitamin D Supplements May Not Work If kidney not healthy: विटामिन D को आमतौर पर सनशाइन विटामिन कहा जाता है। विटामिन D हड्डियों को मजबूत रखने, इम्युनिटी बढ़ाने, मांसपेशियों के सही कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि भारत में विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए ज्यादातर लोग विटामिन D सप्लीमेंट (Vitamin D Supplement) लेते हैं। गौर करने वाली बात तो ये है कि महीनों तक विभिन्न प्रकार की गोली, इंजेक्शन और अन्य सप्लीमेंट लेने के बावजूद लोगों को विटामिन D सप्लीमेंट का फायदा नहीं मिल पाता है। इसकी मुख्य वजह है किडनी फंक्शन का सही तरीके से काम न करना। आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं विटामिन D सप्लीमेंट और किडनी फंक्शन के बीच क्या कनेक्शन है।
डॉ. बसवराज एस. कुम्बार, कंसल्टेंट- इंटरनल मेडिसिन, Aster Whitefield Hospital का कहना है कि जब विटामिन D शरीर में जाता है चाहे वो धूप के जरिए हो या फिर सप्लीमेंट के तौर पर, तो ये तुरंत एक्टिव नहीं होता है। विटामिन डी को एक्टिव होने के लिए 2 अहम चरणों से गुजरना पड़ता है।
डॉ. बसवराज एस. कुम्बार का कहना है कि जब किडनी कमजोर, क्षतिग्रस्त या उम्र के साथ इसके काम करने की क्षमता कम हो जाती है, तब उसकी विटामिन D को एक्टिव करने की क्षमता कम हो जाती है। किडनी के कमजोर होने की स्थिति में विटामिन D सप्लीमेंट का असर बॉडी सेल्स तक पहुंचता है और हड्डियां कमजोर होती चली जाती हैं। यही कारण है कि कुछ लोगों को विटामिन D लेने के बावजूद, हड्डियों में दर्द, बार-बार फ्रैक्चर, मांसपेशियों में ऐंठन लगातार थकान जैसी बीमारियां रहती ही हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि कुछ लोगों को किडनी फंक्शन धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं। ये बिना किसी लक्षण के होता है। आइए आगे जानते हैं किन लोगों में विटामिन D का काम न करना खतरनाक होता है।
डॉ. बसवराज का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को मेडिकल टेस्ट या डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन D सप्लीमेंट का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को पहले से किडनी की समस्या है और ऐसे में वो विटामिन D सप्लीमेंट लेता है, तो उसमें कैल्शियम और फॉस्फेट का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है। इसके कारण धमनियों और हार्ट वाल्व में कैल्सिफिकेशन, किडनी टिशू को नुकसान, कब्ज, उल्टी और किडनी स्टोन की परेशानी हो सकती है।
विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए आप भी सप्लीमेंट लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो पहले नीचे डॉक्टर द्वारा बताए गए मेडिकल टेस्ट जरूर करवाएं।
सीरम क्रिएटिनिन
eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate)
ब्लड कैल्शियम और फॉस्फेट लेवल
ये मेडिकल टेस्ट उन लोगों के बहुत ज्यादा जरूरी है, जिन्हें डायबिटीज, फैमिली किडनी स्टोन की हिस्ट्री या कैल्शियम से जुड़ी परेशानियां रही हों।