
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : April 20, 2026 4:45 PM IST
Who Should Not do Intermittent Fasting: शरीर का बढ़ता वजन आज के समय में एक बड़ी परेशानी बन चुका है, जो सिर्फ एक पर्सनालिटी का इश्यू नहीं है बल्कि हेल्थ से जुड़ी कई बड़ी और जानलेवा बीमारियों का न्योता भी है। डायबिटीज से लेकर हार्ट अटैक तक कई क्रोनिक व जानलेवा बीमारियां हैं, जो मोटापे के कारण हो सकती हैं। शरीर के बढ़ते वजन को कम करने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं और ये तरीके सफल भी हो जाते हैं। लेकिन, फिर भी दुनियाभर में एक बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज जैसी बीमारियों से परेशान हैं और इसके पीछे का कारण है समय की कमी। बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग अपने हेल्दी खानपान और हेल्दी लाइफस्टाइल हैबिट्स को मेंटेन नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, कुछ तरीके हैं, जो बिजी लाइफस्टाइल में भी लोगों को वजन कम करने में लोगों की मदद कर रहा है और वह है इंटरमिटेंट फास्टिंग। लेकिन इसपर सवाल आता है कि क्या है तरीका हर किसी के लिए सही है?
आपके मन में भी अक्सर सवाल आता होगा कि क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग सेफ है? तो इसका जवाब जानने के लिए आपको वजन कम करने वाली इस तकनीक के बारे में अच्छे से समझना होगा। वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे तरीके अपनाने से पहले इनके बारे मेंं अच्छे से समझना बेहद जरूरी है। दरअसल, यह खाना खाने का एक खास तरीका है, जो एक तरह से पैटर्न पर काम करता है। सरल शब्दों में कहें तो इसमें सिर्फ खाना एक पैटर्न के आधार पर 24 घंटों में पहले से निर्धारित किए गए निश्चित समय पर ही खाया जाता है। इसमें 24 घंटे के समय के दो अलग-अलग भागों में बांटा जाता है, जिसे इटिंग विंडो और फास्टिंग विंडो कहा जाता है। इटिंग विंडो वह समय होता है, जिसमें आप खाना खा सकते हैं और फास्टिंग विंडो वह है जिसमें आपको फास्ट रखना है यानी आप खाना नहीं खा सकते हैं।
दरअसल इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने वाले सबसे प्रभावी तरीकों में से एक हैं। इसमें इटिंग विंडो के दौरान जब हम खाना खाते हैं, तो जरूरत से अतिरिक्त भोजन को शरीर फैट यानी चर्बी के रूप में शरीर में जमा कर लेता है। फिर फास्टिंग विंडो के दौरान शरीर को जब भोजन नहीं मिलता तो वह एनर्जी के लिए पहले से जमा की गई फैट यानी चर्बी का इस्तेमाल करने लगता है। यही तरीका शरीर में जमी एक्ट्रा फैट यानी चर्बी को कम करने में मदद करता है।
हालांकि, इंटरमिटेंट फास्टिंग एक बेहद प्रबावी वेट लॉस तकनीक है, लेकिन यह हर किसी के लिए है या नहीं आज भी यह एक बड़ा सवाल है। घुमा-फिरा कर बातें करने की बजाय अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए नहीं है, क्योंकि फास्टिंग विंडो के दौरान शरीर जो पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। इसपर कई अध्ययन भी किए जा चुके हैं, जिनमें पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग बेशक एक अच्छी और सुरक्षित वेट लॉस तकनीक है, लेकिन यह उन लोगों के लिए नहीं है, जो पहले से बीमार या कमजोर हैं। यहां ध्यान देने की बात यह भी है कि कमजोर होने का मतलब पतला-दुबला होना नहीं होता है। जिस व्यक्ति का वजन बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, वह भी शारीरिक रूप से कमजोर हो सकता है, क्योंकि उसके शरीर में भी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
अब बात यह आती है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग आखिर किन लोगों को नहीं करनी चाहिए, उसमें आमतौर पर निम्न लोग शामिल हो सकते हैं -
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