भारतीय थाली में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन कम क्यों होता है?

दिल्ली के द्वारका स्थित मैकक्योर हॉस्पिटल की लीड मैनेजर- न्यूट्रिशन डॉ. सुख सबिया प्रीत कौर बताती हैं कि भारतीय भोजन की बुनियाद ही अनाज पर टिकी हुई है। सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के खाने तक रोटी, चावल, परांठा, इडली, डोसा ही लोगों के पास थाली में नजर आते हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Updated : February 11, 2026 3:36 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Sukh Sabia Preet Kaur

Why Indian thali have more carbohydrate and less protein: भारतीय थाली को अक्सर संतुलित माना जाता है, लेकिन अगर गहराई से देखें तो ज्यादातर घरों की प्लेट में कार्बोहाइड्रेट का हिस्सा बहुत ज्यादा और प्रोटीन का हिस्सा काफी कम होता है। यह पैटर्न पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज की जीवनशैली में यह असंतुलन और भी ज्यादा नजर आने लगा है।

दिल्ली के द्वारका स्थित मैकक्योर हॉस्पिटल की लीड मैनेजर- न्यूट्रिशन डॉ. सुख सबिया प्रीत कौर बताती हैं कि भारतीय भोजन की बुनियाद ही अनाज पर टिकी हुई है। सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के खाने तक रोटी, चावल, परांठा, इडली, डोसा ही लोगों के पास थाली में नजर आते हैं।

इन सभी खाने की चीजों के सोर्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि इसे गेहूं या चावल से बनाया गया है। भारतीय घरों में आज भी गेहूं और चावल को थाली में ज्यादा जगह दी जाती है। इसके विपरीत, प्रोटीन को अक्सर साइड डिश की तरह देखा जाता है। भारतीय थाली में आज भी दाल, दही या सब्जी थोड़ी मात्रा में होती है।

सोच के कारण खाने में कार्बोहाइड्रेट है ज्यादा

न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि पारंपरिक थाली में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के असंतुलन की एक बड़ी वजह हमारी पारंपरिक सोच है। लंबे समय तक भारत में शारीरिक मेहनत ज्यादा होती थी; खेतों और अन्य कामकाज में ऊर्जा की जरूरत अधिक थी। इसलिए कार्बोहाइड्रेट-भरा भोजन पर्याप्त माना जाता था। लेकिन आज की शहरी और बैठकर काम करने वाली जीवनशैली में वही खानपान को अपनाया जा रहा है। ये पैटर्न पूरी तरह से गलत है। आजकल की डेस्क जॉब वालों को खाने में एक बड़ा हिस्सा प्रोटीन का चाहिए होता है।

Protein

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि बहुत से लोग मानते हैं कि प्रोटीन सिर्फ़ नॉन-वेज से ही मिलता है, जबकि दालें, चना, राजमा, छोले, सोया, पनीर, दही, मूंगफली और बीज भी अच्छे प्रोटीन स्रोत हैं। जानकारी की कमी और सही संयोजन न होने की वजह से लोग इन्हें पर्याप्त मात्रा में अपनी थाली में शामिल नहीं कर पाते। एक और कारण यह है कि प्रोटीन को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि यह सिर्फ बॉडी बनाने वालों या जिम जाने वालों के लिए जरूरी है। जबकि सच यह है कि प्रोटीन हर उम्र के व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

प्रोटीन शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वाले लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। आइए जानते हैं प्रोटीन शरीर के लिए क्यों जरूरी है

  1. मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  2. इम्यूनिटी को स्ट्रांग करने में मददगार
  3. हार्मोन संतुलन बनाए रखता है
  4. लंबे समय तक पेट भरा रहता है।
  5. वजन को मैनेज करने, शरीर की कमजोरी को दूर करता है।

थाली में प्रोटीन शामिल करने के लिए नजरिया बदलने की है जरूरत

न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि भारतीय थाली में बदलाव करना मुश्किल नहीं है; बस नजरिया बदलने की जरूरत है। रोटी या चावल की मात्रा थोड़ी कम करके दाल, सब्जी, दही, पनीर या अंकुरित अनाज की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। हर भोजन में किसी न किसी प्रोटीन स्रोत को जानबूझकर शामिल करना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। खाने में प्रोटीन को ज्यादा मात्रा में शामिल करने से बीमारियों का खतरा कम करने में भी मदद मिलती है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।