
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : February 10, 2026 6:22 PM IST
Medically Verified By: Ms. Ginni Kalra
Wajan Kyu Nhi Ghat Rha Hai: आजकल बड़ी संख्या में लोग वजन घटाने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए डाइट रिजॉल्यूशन लेते हैं। शुरुआत में जोश और अनुशासन दिखाई देता है, लेकिन कुछ ही समय बाद अधिकतर लोग अपने डाइट प्लान से भटक जाते हैं। कई बार लोग खुद को इसके लिए दोषी मानते हैं और सोचते हैं कि उनमें इच्छाशक्ति की कमी है। लेकिन आकाश हेल्थकेयर की हेड डायटीशियन गिन्नी कालरा का कहना है कि डाइट फेल होने की असली वजह इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि अव्यावहारिक, जरूरत से ज्यादा सख्त और रोजमर्रा की जिंदगी से मेल न खाने वाले डाइट प्लान होते हैं।
जी हां, यानी की अगर आप अपनी कुछ आदतों को सुधार लें या अपने डेली रूटीन में लगातार शामिल कर लें तो वजन कम करने के प्रोसेस को सही गति मिल सकती है। डायटीशियन गिन्नी कहती हैं कि ‘अधिकतर डाइट रिजॉल्यूशन इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि वे रोजमर्रा की जिंदगी से मेल नहीं खाते और लंबे समय तक निभाए नहीं जा सकते।’ तो फिर आइए हम बिना देर किए डायटीशियन की बताई वेट लॉस टिप्स के बारे में जानते हैं।
डाइट फेल होने की सबसे बड़ी वजह है एक साथ सब कुछ बदलने की कोशिश करना। कई लोग अचानक कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह छोड़ देते हैं, खाना स्किप करने लगते हैं या बहुत कड़े फूड रूल्स फॉलो करने लगते हैं। ऐसे बदलाव शरीर को थका देते हैं और पोषण की कमी भी हो सकती है। कुछ समय बाद भूख और झुंझलाहट बढ़ती है और व्यक्ति फिर से पुरानी गलत आदतों की ओर लौट जाता है।
खाना सिर्फ शारीरिक जरूरत नहीं है, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा होता है। तनाव, मूड, पार्टियां और सामाजिक मौके हमारे खाने के तरीके को प्रभावित करते हैं। अधिकतर डाइट प्लान इन बातों को ध्यान में नहीं रखते, जैसे देर रात का स्ट्रेस ईटिंग या ऑफिस की व्यस्त दिनचर्या। ऐसे में जब जिदगी बीच में आती है, तो डाइट टूट जाती है और लोग खुद को असफल मानने लगते हैं।
कई लोग बस यह सोचते हैं कि ‘हेल्दी खाना है’, लेकिन यह तय नहीं करते कि कैसे और कब। अनियमित समय पर खाना, मील स्किप करना या प्रोटीन और फाइबर की कमी से ब्लड शुगर बिगड़ती है, जिससे कमजोरी और तेज क्रेविंग होती है। बिना तय रूटीन के शरीर हमेशा अलर्ट मोड में रहता है और हेल्दी विकल्प चुनना मुश्किल हो जाता है।
जब वजन जल्दी कम नहीं होता, तो लोगों का मन टूट जाता है। जबकि वजन घटने की प्रक्रिया सीधी नहीं होती। शुरुआत में पाचन बेहतर होना, एनर्जी बढ़ना या पेट की सूजन कम होना जैसे बदलाव भी अहम संकेत होते हैं। इन पर ध्यान न देने से लोग डाइट जल्दी छोड़ देते हैं।
पहला तरीका: छोटे और व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं। परफेक्शन के बजाय धीरे-धीरे बदलाव करें, जैसे सब्जियां बढ़ाना, सही मात्रा में खाना और नियमित मील लेना।
दूसरा: डाइट में संतुलन रखें, रोक-टोक नहीं। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट और फाइबर का संतुलन भूख और एनर्जी दोनों को कंट्रोल करता है।
तीसरा: असली ज़िंदगी के हिसाब से प्लान बनाएं। कभी-कभार पसंदीदा खाना खाने की छूट रखें और सोशल मौकों के लिए पहले से सोचें।
चौथा: मोटिवेशन नहीं, रूटीन पर भरोसा करें। तय समय पर खाना, पहले से मील प्लान करना और हेल्दी स्नैक्स रखना बहुत मददगार होता है।
पांचवां: वजन से ज्यादा सेहत पर ध्यान दें। अच्छी नींद, बेहतर पाचन, ताकत और मूड में सुधार भी सफलता की पहचान हैं।
हेड डायटीशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, ‘सबसे सफल डाइट वही होती है जो किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बन सके और लंबे समय तक निभाई जा सके, न कि सबसे सख्त डाइट।’
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।