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शरीर में किस विटामिन की कमी के कारण होता है हेयरफॉल? जानिए विटामिन का नाम और उनके स्त्रोत भी

​विटामिन डी हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही आवश्यक न्यूट्रीशन है जो शरीर के कई कामों में अपना योगदान देता है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। दांतों, हड्डियों व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी की अहम भूमिका होती है। जब शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है तो इसका असर कई तरह से हमारी सेहत पर पड़ता है। आजकल लोग हेयरफॉल की समस्या से बहुत जूझ रहे हैं। बहुत कम लोगों को यह पता होता कि जब शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है तो बाल कमजोर हो जाते हैं। इसलिए हेयरफॉल को रोकने और बालों से संबंधित अन्य समस्याओं से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप अपने शरीर में विटामिन डी की मात्रा को बनाए रखें।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : October 14, 2020 3:25 PM IST

​विटामिन डी हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही आवश्यक न्यूट्रीशन है जो शरीर के कई कामों में अपना योगदान देता है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। दांतों, हड्डियों व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी की अहम भूमिका होती है। जब शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है तो इसका असर कई तरह से हमारी सेहत पर पड़ता है। आजकल लोग हेयरफॉल की समस्या से बहुत जूझ रहे हैं। बहुत कम लोगों को यह पता होता कि जब शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है तो बाल कमजोर हो जाते हैं। इसलिए हेयरफॉल को रोकने और बालों से संबंधित अन्य समस्याओं से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप अपने शरीर में विटामिन डी की मात्रा को बनाए रखें।

विटामिन डी की कमी के लक्षण

1. घावों का धीमा उपचार. यानी घाव होने पर वो जल्‍द ठीक ना हो।

2. बालों का तेजी से झड़ना या खराब होना।

3. बार-बार बीमार पड़ना।

4. हड्डियों में दर्द की शिकायत रहना, जोड़ों में और और मांसपेशियों में दर्द।

5. हर समय थकान रहना। यहां तक कि सोकर उठने के बाद भी शरीर में कमजोरी या थकान महसूस होना।

विटामिन डी के स्त्रोत

1. दूध पीना बहुत ज़रूरी होता है मगर कुछ लोगों को दूध पीना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। उन लोगों को दूध से बनी चीजों को खाना चाहिए, क्योंकि दूध में कैल्सियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है, जैसे- चीज़ या दही। दही सिर्फ आपके शरीर को पौष्टिकता ही प्रदान नहीं करता है बल्कि कैल्सियम को सोखने में भी मदद करता है।

2. फूड के प्रोसेसिंग के दौरान जो विटामिन और मिनरल खो जाते हैं, उस कमी को फार्टफाइड फूड्स पूरा करने में मदद करते हैं और खाद्द के पौष्टिकता को भी बढ़ाते हैं। विटामिन डी युक्त फार्टफाइड फूड्स में ब्रेड, सेरल, दूध, पनीर, चीज़, सोया मिल्क और संतरा का जूस आदि आते हैं।

3. मशरूम भ विटामिन डी प्राप्त करने का अच्छा स्त्रोत है। इसमें विटामिन डी की प्रचुर मात्रा होती है।

4. मछली भी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत होती है। जो मांसाहारी होते हैं वे मछली के द्वारा विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। मछली में उच्च मात्रा में फैटी एसिड्स होते हैं, जैसे- सामन, ट्यूना, हिलसा, सार्डिन, कड, मैकरल आदि।

5. अंडे और मीट भी विटामिन डी का स्त्रोत हैं। अंडे की जर्दी में काफी अच्छा मात्रा में विटामिन डी होता है।

अधिक मात्रा में विटामिन डी लेने के भी हैं कई नुकसान

1. विटामिन डी की कमी से बालों का झड़ना तेज हो जाता है लेकिन अधिक मात्रा भी बालों के टूटने का कारण बनती है।

2. बच्चों को विटामिन डी की अधिक मात्रा देने से मांसपेशियों में अकड़न, चिड़चिड़ापन, चलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

3. जब विटामिन डी की खुराक अधिक ली जाती है तो शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है।

4. ज्यादा मात्रा में विटामिन डी का सेवन हड्डियों को कमजोर कर सकता है। हाई ब्लड प्रेशर का कारण भी विटामिन डी की अधिक खुराक बन सकती है।

5. शरीर में विटामिन डी की दवा की वजह से जब कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है तो भूख लगना बंद हो सकता है.

6. बहुत अधिक मात्रा में विटामिन डी का सेवन बड़े लोगों के शरीर में दर्द का कारण भी बन सकता है.

7. बहुत अधिक मात्रा में विटामिन डी खाने से कब्ज, दस्त और सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है।