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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 12, 2021 7:45 PM IST
बारिश के मौसम में क्या खाएं स्वीट कार्न या देसी भुट्टा! कौन है सेहत के लिए ज्यादा हेल्दी, जानें सही जवाब
बारिश के मौसम में भुट्टा खाने का मजा ही अलग होता है लेकिन जब बात कार्न की आती है तो लोग इस बात को संशय में पड़ जाते हैं कि दोनों में कौन सबसे ज्यादा हेल्दी है। बारिश के मौसम में लोगों को गर्मागर्म और टेस्टी चीजें खाने का मन करता है। आसमान से टपकती बूंदें और आस-पास बिखरा पानी और सामने खड़ा भुट्टा वाला आपके मन में लालच पैदा कर देता है कि चलो यार भुट्टा खाया जाए। बारिश में भीगते हुए जलते कोयले पर सही तरह से भुना हुआ भुट्टा और उसपर नींबू का रस और नमक का छिड़काव आपकी बारिश के पलों को और सुखद बना देता है।
वे लोग, जो भुने भुट्टे के शौकीन नहीं हैं, उनके लिए स्वीट कॉर्न एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। स्वीट कॉर्न हो या देसी भुट्टा, दोनों का अपना अलग-अलग स्वाद होता है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि दोनों ही विकल्प स्वादिष्ट होते हैं। हां, जब बात पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभ की आती है तो लोगों के बीच इन दोनों की तुलना शुरू हो जाती है और सभी लोग अधिक हेल्दी विकल्प तलाशने में जुट जाते हैं। आइए बताते हैं आपको दोनों में कौन ज्यादा हेल्दी है।
कार्न या भुट्टा दूसरे प्रकार के अनाज की ही तरह हेल्दी भी हैं। ये लाल, नारंगी, बैंगनी, नीला, सफेद और काले जैसे कई रंगों में उपलब्ध होते हैं, जो निश्चित रूप से ढेर सारे स्वस्थ पोषक तत्वों से भरे हुए होते हैं।
100 ग्राम उबले हुए कार्न में ये पोषक तत्व होते हैं:
कॉर्न में कार्ब का मुख्य स्रोत स्टार्च होता है, जो सूखे हुए कॉर्न का करीब 30-80 प्रतिशत तक होता है। कॉर्न में थोड़ी मात्रा शुगर की भी होती है, जिसमें से अधिकांश सुक्रोज होता है। स्वीट कॉर्न में चीनी की मात्रा होने के बावजूद, इसे हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड के रूप में परिभाषित नहीं किया जाता है। कॉर्न में प्रोटीन की उचित मात्रा पाई जाती है, जो इसकी अलग-अलग किस्मों के आधार पर 10-15 प्रतिशत के बीच होती है। इसके अलावा, यह अनाज कुछ पोषक तत्वों जैसे मैंगनीज, फास्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक से भी लैस होता है।
नियमित रूप से कॉर्न का सेवन करने से ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। बता दें कि कॉर्न में ढेर सारे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, ज्यादातर कैरोटीनॉयड जैसे ज़ेक्सैन्थिन और ल्यूटिन, जो आंखों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम करते हैं। ल्यूटिन आपकी आंखों को लैपटॉप और सेल फोन स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से पैदा होने वाले ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में भी मदद कर सकता है। इसमें मौजूद पोटेशियम की मात्रा हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का काम करती है। इतना ही नहीं इसमें मौजूद फोलेट शिशुओं में मस्तिष्क के विकास में मदद कर सकता है।
कॉर्न में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा आपको डायवर्टीकुलर बीमारी से बचा सकती है, ये एक ऐसी स्थिति जो आपकी आंत की किनारों में पाउच का काम करती है। इस स्थिति के मुख्य लक्षणों में ऐंठन, पेट फूलना और सूजन शामिल हैं।
ये बात सही है कि कि कि किसी भी चीज की अति शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है, भले ही वह पौष्टिक भोजन ही क्यों न हो। इसलिए ढेर सारे पोषक तत्वों से भरा होने के बाद भी कॉर्न का सेवन आपको सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि इससे कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं।
कॉर्न में थोड़ी मात्रा फाइटिक एसिड की भी होती है, जो शरीर में आयरन और जिंक जैसे मिनरल्स के अवशोषण को बाधित कर सकती है। एक ही दिन में ज्यादा कार्न का सेवन करने से पेट में सूजन और कब्ज जैसी समस्या हो सकती है।