यूरिक एसिड के मरीज गलती से भी न खाएं ये दालें बढ़ा सकती है परेशानी, आज ही कर लें इनकी पहचान

Pulses for uric acid: यूरिक एसिक के मरीजों के अपनी डाइट को लेकर काफी सावधान रहना पड़ता है, क्योंकि कुछ हेल्दी दिखने वाले फूड्स भी उन्हें बीमार बना सकते हैं। इनमें से एक के बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : September 19, 2024 7:01 AM IST

Dal not to eat in uric acid: दालें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं, क्योंकि दालें प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं, जो मांसाहारी भोजन का विकल्प हैं। यह मांसपेशियों के विकास और मरम्मत के लिए आवश्यक है। दालों में उच्च फाइबर सामग्री पाए जाने के कारण यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं, जिससे कब्ज की समस्या कम होती है। दालों को नियमित रूप से अपने आहार में शामिल करने से आपके स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। इन्हें सलाद, सूप, करी या दाल-चावल के रूप में तैयार किया जा सकता है। लेकिन कुछ प्रकार की दालें यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकती हैं, खासकर उन लोगों में जो पहले से ही उच्च यूरिक एसिड से ग्रसित हैं या जिन्हें गाउट (Gout) की समस्या है। यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या (हाइपरयूरिसीमिया) से पीड़ित लोगों को कुछ प्रकार की दालों का सेवन सीमित मात्रा में या पूरी तरह से बंद करने की सलाह दी जाती है। दालों में प्यूरिन (purine) नामक यौगिक पाया जाता है, जो शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है। जब प्यूरिन का मेटाबॉलिज़्म होता है, तो इसका परिणाम यूरिक एसिड के रूप में निकलता है। यदि यूरिक एसिड का स्तर अधिक हो जाता है, तो यह गाउट (Gout) या जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। यूरिक एसिड को बढ़ाने वाली यह हैं कुछ दालें।

उड़द दाल (Black Gram)

उड़द दाल खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होती है, जो कि काफी लोगों को पसंद भी होती है, लेकिन बहुत से लोगों को इससे परेशानी होती है, क्योंकि उड़द दाल में प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसका सेवन यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है। जिन लोगों को पहले से यूरिक एसिड की समस्या है, उन्हें उड़द दाल से परहेज करना चाहिए।

मसूर दाल (Red Lentils)

साबुत मसूर या मसूर दाल फोलेट (विटामिन बी 9 या फोलिक एसिड) में समृद्ध है जो आपके शरीर में नई कोशिकाओं, विशेष रूप से लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में और उन्हें बनाए रखने में मदद करती है। मगर मसूर दाल प्यूरिन की थोड़ी अधिक मात्रा वाली होती है, जो यूरिक एसिड को बढ़ा सकती है। यह उन लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकती है जो पहले से हाइपरयूरिसीमिया या गाउट से पीड़ित हैं।

चना दाल (Bengal Gram)

चना दाल भी खाने में स्वादिष्ट होती है, जिसे जिसका सेवन कई रूपों में किया जा सकता है। मगर चना दाल में भी प्यूरिन की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, जो यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित कर सकती है। जिन लोगों को पहले से गाउट या उच्च यूरिक एसिड की समस्या है, उन्हें इसका सेवन सीमित रखना चाहिए।

यह दालें हैं सुरक्षित

मूंग दाल और अरहर (तूर) दाल में प्यूरिन की मात्रा कम होती है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। इन दालों में पोषण तत्व भी अधिक होते हैं, जिससे वे संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं।

किन लोगों को दालों का सेवन नहीं करना चाहिए

गाउट से पीड़ित व्यक्ति: गाउट के मरीजों को उन दालों से बचना चाहिए जिनमें प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जैसे उड़द, मसूर, और चना दाल।

हाइपरयूरिसीमिया से पीड़ित लोग: अगर किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड का स्तर पहले से ही अधिक है, तो उसे उन दालों का सेवन नहीं करना चाहिए जो प्यूरिन से भरपूर हैं।

किडनी स्टोन के मरीज: जिन लोगों को किडनी में यूरिक एसिड की पथरी है, उन्हें भी प्यूरिन युक्त दालों से बचने की सलाह दी जाती है।

यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने के लिए उन दालों का सेवन सीमित या बंद करना चाहिए जिनमें प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जैसे उड़द, मसूर, और चना दाल। इसके बजाय, मूंग और अरहर दाल जैसी दालों का सेवन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। यूरिक एसिड से संबंधित समस्याओं के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना हमेशा उचित होता है।

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