
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : April 14, 2026 1:06 PM IST
Medically Verified By: Dr. Rupam Borgohain
अगर सुबह-सुबह नींद खुलते ही हाथ-पैरों में झनझनाहट महसूस हो तो कुछ समय लोग इसे इग्नोर करते हैं। लेकिन अगर ये कुछ दिनों तक लगातार होती है तो लोगों को डर लगता है कि उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को रोज सुबह उठते ही हाथ पैरों में झनझनाहट महसूस होती है तो डर लगना लाजमी है। आम भाषा में लोग इसे हाथ पैरों का सो जाना कहते हैं, लेकिन मेडिकल टर्म में इसे पेरेस्थीसिया कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह किसी गलत पोजीशन में सोने की वजह से होता है, लेकिन अगर यह रोज की बात बन जाए, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। आइए, एकदम आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर सुबह की यह झनझनाहट किन बीमारियों का संकेत हो सकती है।
अक्सर जब हम सुबह उठते हैं तो महसूस होता है कि हाथ या पैर सुन्न पड़ गए हैं या उनमें सुइयां चुभने जैसी झनझनाहट हो रही है। अक्सर यह गलत तरीके से सोने के कारण होता है। जब हम गलत पोजीशन में सोते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट होने लगती है। लेकिन अगर झनझनाहट के साथ दर्द, कमजोरी या जलन भी महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
वैसे तो हाथ-पैरों में झनझनाहट होने की मुख्य वजह नर्वस सिस्टम या ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी होना होता है। लेकिन निम्न कारण भी हो सकते हैं:
विटामिन B12 की कमी
हमारे नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन B12 सबसे जरूरी है। अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो नसों के ऊपर की सुरक्षा परत कमजोर होने लगती है। इसके कारण सुबह उठते ही हाथों और पैरों में झनझनाहट और झटके महसूस हो सकते हैं।
डायबिटिक न्यूरोपैथी
डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड शुगर लंबे समय तक रहने के कारण नसों को नुकसान पहुंचता है। इसे 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' कहते हैं। इसमें झनझनाहट की शुरुआत सबसे पहले पैरों के तलवों और हाथों की उंगलियों से होती है।
कार्पल टनल सिंड्रोम
अगर झनझनाहट केवल हाथों और कलाई में महसूस होती है, तो यह कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है। यह समस्या तब होती है जब कलाई की मुख्य नस दब जाती है। ऑफिस में ज्यादा टाइपिंग करने वालों या मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने वालों में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
गर्दन की हड्डियों या डिस्क में समस्या होने पर वहां से गुजरने वाली नसें दबने लगती हैं। इसका असर हाथों तक जाता है, जिससे सुबह उठने पर हाथ भारी और झनझनाहट भरे महसूस होते हैं। इसी तरह, कमर की नस दबने पर पैरों में झनझनाहट होती है।
खराब रक्त संचार
रात को सोते समय यदि हाथ या पैर किसी ऐसी स्थिति में दब जाएं जिससे खून का दौरा रुक जाए, तो सुबह उठते ही वह हिस्सा सुन्न जैसा हो जाता है। हालांकि, यह पोजीशन बदलते ही ठीक हो जाता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
आमतौर पर डॉक्टर विटामिन B12 टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट और नसों की स्थिति जानने के लिए NCV (Nerve Conduction Velocity) टेस्ट की सलाह देते हैं।
अगर यह समस्या रोज हो रही है, झनझनाहट के साथ कमजोरी महसूस हो रही है, या आप चीजें पकड़ नहीं पा रहे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
हां, इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। शुगर लेवल बढ़ा रहने से नसें डैमेज होने लगती हैं, जिसकी शुरुआत पैरों के तलवों में झनझनाहट से होती है।
मुख्य रूप से विटामिन B12 की कमी नसों को कमजोर करती है, जिससे हाथों और पैरों में झनझनाहट होती है।
अक्सर गलत पोजीशन में सोने से ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है, जिससे हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं।