Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
Haemoglobin Level Normal Range: एनिमिया एक गम्भीर बीमारी है जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होने लगती है। जब हीमोग्लोबिन का लेवल शरीर में नॉर्मल रेंज से कम हो जाए तो इसकी वजह से शरीर में ब्लड की मात्रा भी कम हो जाती है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि हेल्दी रहने के लिए शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सही रहना कितना जरूरी है। इस लेख में बात करते हैं कि हीमोग्लोबिन क्या है और शरीर में कब और क्यों होती है हीमोग्लोबिन की कमी।
यह एक प्रकार का प्रोटीन है जो ब्लड में मौजूद होता है। यह प्रोटीन शरीर के हर टिश्यू तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब रक्त में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है तो इससे ऑक्सीजन की सप्लाई भी कम होने लगती है। ऑक्सीजन कम होने से शरीर की कार्यप्रणालियां या फंक्शनिंग में रूकावट आ सकती है।
अक्सर, तबियत खराब होने,वजन कम होने या कमजोरी होने पर लोगों को हीमोग्लोबिन चेक कराने के लिए कहा जाता है। लेकिन, अक्सर देखा जाता है कि बहुत से लोगों को हीमोग्लोबिन लेवल के बारे में सही जानकारी नहीं होती है। क्या आप नहीं जानते कि हीमोग्लोबन की नॉर्मल रेंज क्या है?
महिलाओं और पुरुषोंदोनों में हीमोग्लोबिन लेवल का स्तर अलग-अलग होता है। महिलाओं में हीमोग्लोबिन का नॉर्मल रेंज 12 से 16 एमजी/ डीएल होती है जबकि पुरुषों में 14 से 18 एमजी/डीएल होना चाहिए। जब हीमोग्लोबिन लेवल इससे कम हो जाता है तो डॉक्टरों द्वारा उसे बढ़ाने के लिए सही उपाय करने की सलाह दी जाती है।
एनीमिया
थकान
कमजोरी महसूस करना
हार्ट डिजिजेज का रिस्क
सांस लेने से जुड़ी परेशानियां
बॉडी में हीमोग्लोबिन का स्तर ठीक रखने के लिए आपको आयरन रिच फूड्स (Iron rich foods) खाने की सलाह सबसे पहले दी जाती है। क्योंकि, आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाला तत्व है। आप एनिमिया या लो हीमोग्लोबिन लेवल के लक्षण(low haemoglobin level signs and symptoms) दिखायी दें तो आप अपनी डाइट में आयरन रिच फूड्स की मात्रा बढ़ा सकते हैं। हीमोग्लोबिन के लिए इन फूड्स का सेवन करें-
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।