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कैसे बनता है साबूदाना और कौन से पौष्टिक गुण आपको रखते हैं एक्टिव? जानेंगे तो खुद को खाने से नहीं रोक पाएंगे

बहुत से लोग बिना व्रत के भी साबूदाना खाना पसंद करते हैं जैसे की साबूदाने की टिक्की, साबूदाने की खिचड़ी आदि। कुछ लोग वेट लॉस के लिए भी साबूदाने का प्रयोग करते हैं क्योंकि ये आपको लंबे वक्त तक फुल रखने में मदद करता है और आप इस फूड के साथ अपनी भूख को भी शांत रख सकते हैं। लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि कई प्रकार से प्रयोग में लाया जाने वाला साबूदाना आखिर बनता कैसे है?

आपने कई बार देखा होगा कि नवरात्रि में बहुत सी व्रती महिलाएं और पुरुष व्रत को खोलने के लिए कुट्टू का आटा, सिंघाड़े के आटे और तो और समा के चावल का सेवन करते हैं। इन सभी फूड्स के अलावा व्रत में खाई जाने वाली एक और चीज है, जो लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है और पौष्टिक गुणों से भी भरपूर होती है। जी हां, ये चीज है साबूदाना, जिसे लोग अलग-अलग तरीके से खाना पसंद करते हैं। बहुत से लोग बिना व्रत के भी साबूदाना खाना पसंद करते हैं जैसे की साबूदाने की टिक्की, साबूदाने की खिचड़ी आदि। कुछ लोग वेट लॉस के लिए भी साबूदाने का प्रयोग करते हैं क्योंकि ये आपको लंबे वक्त तक फुल रखने में मदद करता है और आप इस फूड के साथ अपनी भूख को भी शांत रख सकते हैं। लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि कई प्रकार से प्रयोग में लाया जाने वाला साबूदाना आखिर बनता कैसे है? अगर आप इस बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं तो इस लेख में हम आपको ऐसी कुछ चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें जानकर आप इसे खाने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।

सागो पेड़ के तने से बनता है साबूदाना

अगर आप सोच रहे हैं कि साबूदाना किसी अनाज से बनता है तो आप बिल्कुल गलत हैं। साबूदाना सागो पाम नाम के पेड़ के तने से निकलने वाले गूदे से बनता है। ताड़ की ही तरह दिखने वाला सागो भी एक प्रकार का पेड़ है और ये मूल रूप से पूर्वी अफ्रीका में अधिक पाया जाता है। सागो पेड़ का तना बहुत ही मोटा होता है। तने के बीच के हिस्से को अलग किया जाता है फिर उसे पीसकर पाउडर बनाया जाता है।

तने के बीच के हिस्से को पीसने के बाद जब ये पाउडर तैयार हो जाता है तो उसे छानकर गर्म किया जाता है, जिसके बाद उन्हें दानों का रूप दिया जाता है। साबूदाना को बनाने के लिए ‘टैपिओका रूट’ का प्रयोग किया जाता है, जिसे ‘कसावा’के रूप में भी जाना जाता है। ज्यादा लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे कि कसावा स्टार्च को ही टैपिओका कहा जाता है।

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ऐसे बनाया जाता है साबूदाना

भारत में भी साबूदाना का निर्माण टैपिओका स्टार्च से किया जाता है। इस स्टार्च को बनाने के लिए शकरकंद जैसे दिखने वाले कसावा नाम के कंद का इस्तेमाल किया जाता है। कसावा नाम के कंद में से निकलने वाले गूदे को बड़े-बड़े बर्तनों में निकाला जाता है और इसे 8 से 10 दिनों तक उन बर्तनों में स्टोर करके रखा जाता है। ये सही हालत में रहे इसके लिए रोजाना इसमें पानी भी डाला जाता है नहीं तो सूख सकता है।

4 से 6 महीनों में बनता है साबूदाना

साबूदाने को बनाने वाली इस प्रक्रिया को 4-6 महीने तक कई बार दोहराया जाता है। जब ये गूदा तैयार हो जाता है तो उसे निकालकर मशीनों में डाला जाता है और आखिरकार हमें मोतियों जैसा साबूदाना प्राप्त होता है। इस साबूदाने को सुखाकर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर द्वारा पॉलिश की जाती है, जिससे इसपर सफेद चमक आती है और हमारे सामने ये पैकेटों में बंद होकर तैयार होता है।

पौष्टिक गुणों का भंडार साबूदाना

साबूदाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा होती है और इसमें कैल्शियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान साबूदाने से बनी चीजें आपको ऊर्चा प्रदान करती हैं और साथ ही आपकी इम्यूनिटी भी बूस्ट करती हैं। साबूदाने की खिचड़ी, हलवा, चाट सभी चीजें व्रत में बनाई जाने वाली स्वादिष्ट रेसिपीज हैं।

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