
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Sharad Malhotra
Low Glycemic Diet
कभी इंटरमिटेंट फास्टिंग तो कभी डाइट फॉलो करने का कोई दूसरा तरीका, सोशल मीडिया पर आपको कई तरह की डाइट मिल जाएंगी। हाल ही में लो ग्लाइसेमिक डाइट बहुत ही ज्यादा पॉपुलर हो रही है। हो सकता है आपने भी इसका नाम सुना हो, लेकिन ये क्या होती है? यह जानने के लिए हमने बात ही आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉक्टर शरद मल्होत्रा से।
उन्होंने बताया कि लो-ग्लाइसेमिक डाइट पिछले कुछ वर्षों में काफी लोकप्रिय हुई है। आजकल वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल करने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने के लिए बहुत से लोग इस डाइट को फॉलो कर रहे हैं। कुछ तो इस स्मार्ट ईटिंग का नया तरीका बता रहे हैं।” लेकिन क्या यह सिर्फ एक ट्रेंड है? डॉक्टर बताते हैं कि अगर इस डाइट को सही तरीके से अपनाया जाए तो यह ब्लड शुगर कंट्रोल के साथ-साथ मेटाबॉलिक हेल्थ में भी मदद कर सकती है। कैसे? आइए एक्सपर्ट से ही जानते हैं।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिपोर्ट बताती है कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) यह मापता है कि कोई भोजन ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ा सकता है। वहीं जिन फूड्स में Low GI (≤55) होता है, वे धीरे-धीरे ब्लड शुगर बढ़ाने का काम करते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि इस डाइट में साबुत अनाज, दालें, बीन्स, ओट्स, हरी सब्जियां, बिना स्टार्च वाली सब्जियां, सेब, अमरूद, नाशपाती, जामुन, मेवे और बीज जैसी चीजों को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं सफेद ब्रेड, मैदा, मीठे पेय, मिठाइयां और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टर बताते हैं कि लो-ग्लाइसेमिक डाइट अपनाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। ऐसे में वे लोग जो वजन कम करना चाहते हैं, वे कम कैलोरी का सेवन कर पाते हैं। यही वजह है कि वेट कंट्रोल करने वालों में यह डाइट ज्यादा पसंद की जा रही है।
इसके अलावा, यह डाइट इंसुलिन सेंसिटीविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है और प्री-डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है। लेकिन बिना किसी डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के ऐसा न करें।
डॉक्टर ने बताया कि लो-ग्लाइसेमिक वाले फूड्स में फाइबर प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह फाइबर डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह शरीर में ऊर्जा का स्तर लंबे समय तक बनाए रखने में भी सहायक होता है।
हालांकि लो-ग्लाइसेमिक डाइट को स्वस्थ माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कम GI वाले फूड्स का असीमित मात्रा में सेवन किया जाना सही है। किसी भी डाइट में संतुलित और सही मात्रा में पोषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। इसलिए खुद से अपने लिए डाइट प्लान बनाने की बजाय डाइटीशियन की सलाह लें।
डिस्क्लेमर: लो-ग्लाइसेमिक डाइट का उद्देश्य ब्लड शुगर को स्थिर रखना और शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी उपलब्ध कराना है। यह डायबिटीज के मरीजों के साथ-साथ वजन कम करने वालों के लिए भी फायदेमंद है। हर व्यक्ति की शरीरिक और स्वास्थ्य जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या क्लिनिकल डाइटिशियन से सलाह जरूर ले।