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ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां लगातार कमजोर होती जाती हैं और हड्डियों में नए टिश्यू या तो बनने बंद हो जाते हैं या फिर बेहद धीमी रफ़्तार से बनते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस का सबसे बड़ा कारण शरीर में कैल्शियम की कमी होना है, जो कि धीरे धीरे हड्डियों को कमजोर बना देता है। हालांकि इसके इलाज़ के लिए दवाईयां और व्यायाम जरूरी होते हैं, पर सबसे अहम भूमिका होती है खानपान में ऐसे चीज़ों को शामिल करने कि जिससे कैल्शियम का स्तर सामान्य हो सके।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि, ओलिव ऑयल, सोयाबीन तथा ओमेगा 3 से युक्त मछलियां और अन्य समुद्री आहार ऑस्टियोपोरोसिस के लिए बेहद कारगर होते हैं। इसके अलावा चाय जैसे पेय पदार्थ भी हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं।
सबसे अहम बात यह समझना है कि ऑस्टियोपोरोसिस को नियंत्रित रखने व हड्डियों को मजबूत करने के लिए जहां उन खाद्य पदार्थों की पहचान जरूरी है जो हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं; वहीं यह भी आवश्यक है कि उन पदार्थों से बचा जाए जो हड्डियों के लिए नुकसानदायक हैं। जब तक दोनों ही पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तब तक न तो ऑस्टियोपोरोसिस का मुकाबला किया जा सकता है और न ही हड्डियों को कमजोर होने से रोका जा सकता है।
बीन्स में केल्सियम, मैग्नेशियम जैसे तत्वों के अलावा फाइबर व फाइलेट जैसे पदार्थ बड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं। फाइलेट शरीर के कैल्शियम सोखने की क्षमता को प्रभावित करता है; इसलिए इन्हें पकाने से पहले कुछ घंटे पानी में डूबोकर रखना चाहिए।
नींबू व संतरे जैसे पदार्थों में विटामिन-सी की मात्रा बेहद अधिक होती है जो हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। विटामिन-सी कोलाजिन के उत्पादन के लिए जरूरी होता है जो कि हड्डियों और जोड़ों के लिए आवश्यक प्रोटीनों के लिए बेहद मददगार होते हैं।
अखरोट, बादाम आदि पदार्थों में आम तौर पर पोषण की भारी मात्रा होती है, पर खासकर इनमें से कुछ हड्डियों के क्षरण को रोकने में बेहद असरदार होते हैं। सूरजमुखी के बीज में कैल्शियम, मैग्नेशियम व जिंक बड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
हड्डियों के लिए प्रोटीन की सही मात्रा बेहद जरूरी है-पर यह जरूरत से अधिक नहीं होनी चाहिए। कई बुजुर्गों की डाइट में प्रोटीन की मात्रा बेहद कम होती है जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पर, अगर ऐसे स्पेशल हाई प्रोटीन वाले पदार्थ लिए जाए जिसमें प्रोटीन की मात्रा बेहद अधिक होती है, तो उससे शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ने के बजाय कम हो जाती है। ऐसे में दूध व दूध से बने पदार्थ भी हड्डियों के लिए बेहद मददगार हो सकते हैं।
ऐसे पदार्थ जिनमें नमक की मात्रा बेहद अधिक होती है, उनके सेवन से नमक में मौजूद सोडियम के चलते शरीर में मौजूद कैल्शियम का क्षरण होने लगता है। इसलिए डब्बाबंद, चिप्स आदि व अन्य नमकीन पदार्थों का इस्तेमाल सीमित रखना चाहिए। पैक्ड खानों में पोषण तत्वों की जानकारी अक्सर मौजूद रहती है; इसे सही से देखते हुए उन पदार्थों से बचना चाहिए जिनमें सोडियम की मात्रा बेहद अधिक होती है। 20% या उससे अधिक सोडियम वाले खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल को सीमित रखते हुए रोजाना सोडियम का इस्तेमाल 2300 मिलीग्राम तक रखना चाहिए।
हालांकि पालक जैसे पदार्थों में अनेक पोषक तत्व होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम हैं। पर, इनमें ऑक्सलेट भी बड़ी मात्रा में होते हैं जिससे कैल्शियम की बड़ी मात्रा के बावजूद हमारा शरीर इसे सोख नहीं पाता है। इसलिए पालक, बीट आदि को कैल्शियम के स्रोत के तौर पर नहीं देखना चाहिए।
हालांकि चाय हड्डियों के लिए फायदेमंद है, पर चाय समेत उच्च कैफीन की मात्रा वाले अन्य पदार्थों के सेवन से शरीर की केल्शियम को सोखने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे पेय पदार्थों के अधिक सेवन से हड्डियां लगातार कमजोर होती जाती हैं। शोध के मुताबिक, एक दिन में 3 कप से अधिक चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि, कोल्ड ड्रिंक्स में फास्फोरस भी होता है जो हमारे हड्डियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, पर इनके सेवन से शरीर में फॉस्फोरिक एसिड बनता है जो कि कैल्शियम के क्षरण और हड्डियों को कमजोर करने का जिम्मेदार बनता है।
शराब की अधिक मात्रा हड्डियों को कमजोर बनाता है। इसलिए इसके सेवन को हमेशा सीमित रखना चाहिए।
इन सभी पहलुओं का अपने रोजाना खान-पान में ध्यान रखने से आप ऑस्टियोपोरोसिस का आप न केवल मुक़ाबला कर सकते हैं।
Inputs By: Mrs Debjani Banerjee, Incharge Dietetics, PSRI Hospital New Delhi