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ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा हुआ आने पर डाइट में कौन से सुधार करना जरूरी है?

कई बार जब हम अपना बल्ड टेस्ट करवाते हैं तो उसमें ट्राइग्लिसराइड्स हाई आथा है। लेकिन क्या आप जाते हैं यह क्या होता है और ट्राइग्लिसराइड्स के हाई आने का क्या मतलब होता है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 23, 2026 10:40 PM IST

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Medically Verified By: Ms. Pooja Gupta

पहले आपको यह स्पष्ट कर दें कि ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) आखिर होता क्या है। यह खून में मौजूद एक तरह की फैट होती है, जिसका इस्तेमाल शरीर ऊर्जा के लिए करता है। लेकिन जब इसकी मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो यह हार्ट और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने के पीछे असंतुलित खान-पान, अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब का सेवन, डायबिटीज और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

पारस हेल्थ, पंचकूला की हेड डाइटीशियन पूजा गुप्ता कहती हैं कि अगर आपकी रिपोर्ट में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए आए हैं, तो दवाओं के साथ-साथ डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है और डाइट में बदलाव डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार करना चाहिए।” आइए अब डॉक्टर से जानते हैं डाइट में कौन से सुधार करने जरूरी हैं।

चीनी और मीठी चीजों का सेवन कम करें

ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप चीनी का सेवन कम करना शुरू कर दें। मिठाई, केक, पेस्ट्री, कुकीज, चॉकलेट, मीठे पेय और पैकेज्ड जूस जैसी चीजों में मौजूद एक्सट्रा शुगर शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए इनका सेवन सीमित करना बेहतर है।

रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से दूरी बनाएं

डाइटीशियन बताती हैं कि मैदे से बनी चीजें, सफेद ब्रेड, बिस्कुट और अन्य रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स का अधिक सेवन भी ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने का कारण बन सकता है। इनके बजाय आप साबुत अनाज, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और अन्य फाइबर रिच ऑप्शन को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

तली-भुनी और ट्रांस फैट वाली चीजें कम करें

देखें, डीप फ्राइड फूड, फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना जरूरी है। इनकी जगह घर पर बनाया गया हेल्दी खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर बाहर खाना जरूरी है तो वहां भी थाली टाइप का कुछ हेल्दी ऑर्डर करें। साथ ही ध्यान रखें कि खाना पकाने के लिए तेल की मात्रा भी नियंत्रित रखनी भी जरूरी है।शराब से दूरी बनाएं

शराब का सेवन कुछ लोगों में ट्राइग्लिसराइड्स को काफी बढ़ा सकता है। खासतौर पर जिन लोगों का ट्राइग्लिसराइड स्तर बहुत अधिक है, उन्हें शराब से पूरी तरह बचने की सलाह दी जा सकती है। इस बारे में डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना जरूरी है।

इन को डाइट में शामिल करें

ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल करने के लिए हरी सब्जियां, सलाद, फलियां, दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, फलों का सेवन भी संतुलित मात्रा में करना चाहिए और डाइटीशियन कहती हैं कि फलों के जूस की जगह पूरा फल खाना बेहतर विकल्प माना जाता है।हेल्दी फैट का चुनाव करें

हमारे शरीर को हेल्दी फैट की जरूरत होती है, जिसके लिए नट्स, बीज, एवोकाडो और मछली जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है। अच्छे फैट वाले फूड्स को बैलेंस मात्रा में अपनी डाइट में शामिल करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

डाइटिशियन पूजा कहती हैं कि ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बहुत ज्यादा होने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए आने पर खुद से डाइट या दवा में बड़े बदलाव करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर आपकी पूरी रिपोर्ट, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिम कारकों को देखते हुए सही उपचार और डाइट प्लान की सलाह दे सकते हैं।

डिस्क्लेमर: ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ एक फूड को छोड़ना काफी नहीं है। एक्सट्रा शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट को कम करना, तली-भुनी चीजों से बचना, शराब का सेवन कंट्रोल करना, संतुलित डाइट लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। सही डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव के साथ नियमित मेडिकल जांच भी जरूरी है।