
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : April 16, 2026 7:30 PM IST
anti nutrients in hindi
What Are The Anti Nutrients in Hindi: खासतौर पर भारतीय खाने में जब भी किसी हेल्दी चीज की बात आती है, तो दालों को बेहद फायदेमंद माना जाता है और ऐसा इसलिए है क्योंकि दालों में खूब पोषक तत्व पाए जाते हैं जिनमें प्रोटीन जैसे बेहद जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें भी कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो शरीर को पोषण सोखने से रोकते हैं। वैज्ञानिक भाषा में इन्हें एंटी-न्यूट्रिएंट्स कहा जाता है। ये तत्व अक्सर आयरन, कैल्शियम, जिंक जैसे जरूरी पोषकों को अवशोषित होने से रोकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप दालें खाना ही छोड़ दें, बल्कि कुछ खास तरीकों की मदद से इन एंटी-न्यूट्रिएंट्स के प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस लेख में हम पहले उन एंटी न्यूट्रिएंट्स के बारे में जानेंगे और फिर यह जानेंगे कि इनके प्रभाव को कम कैसे किया जा सके।
आपने अक्सर सुना होगा कि पालक के साथ दूध नहीं पीना चाहिए, क्योंकि पालक में ऑक्सलेट होता है और वह कैल्शियम को अब्जॉर्प्शन को रोकता है। पालक के साथ-साथ अन्य कई सब्जियों में ऑक्सलेट पाया जाता है, ज्यादातर हरी सब्जियां और चुकंदर के पत्ते आदि शामिल हैं। ऐसे में जो लोग ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करते हैं, उन्हें कैल्शियम की कमी के कारण जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है।
बचाव के तरीके - ऑक्सलेट फूड खाने से 2 घंटे पहले या बाद में ही कैल्शियम वाली चीजें जैसे दूध व अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स आदि खाने चाहिए।
पोषक तत्वों के अब्जॉर्प्शन को रोकने वाले लेक्टिन्स दालों में भी पाए जाते हैं, जिनका अगर ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो ये आंत के अंदर परत बना लेते हैं जिससे पोषक तत्व अवशोषित नहीं हो पाते हैं। ये खासतौर पर राजमा, चना और अन्य दालों आदि में ज्यादा पाए जाते हैं। हालांकि, जो लोग इनका बहुत ज्यादा सेवन करते हैं, उनके लिए पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा कुछ हद तक बढ़ सकता है।
बचाव के तरीके - दालों व बीन्स आदि को पहले अच्छे से पानी में भिगो लेना चाहिए और अच्छे से पका लेना चाहिए। ऐसा करने पर इन लेक्टिन्स का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।
यह भी पोषक तत्वों को अवशोषित होने से रोकने वाले तत्व होते हैं, जो आमतौर पर आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स को शरीर में अच्छे से अवशोषित होने से रोकते हैं। ये फाइटेट्स आमतौर पर साबुत अनाज व दालों और बीजों आदि में पाए जाते हैं। ज्यादा मात्रा में इन फूड्स का सेवन करने से ये जरूरी मिनरल्स अच्छे से अवशोषित नहीं हो पाते हैं।
बचाव के तरीके - आप दालों को भिगोएं, अंकुरित करें और अच्छे से पकाएं तो फाइटेट्स के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। साबुत अनाज व अन्य चीजों को अच्छे से पका कर खाने से इन फाइटेट्स का प्रभाव कम हो सकता है, जिससे शरीर भी पोषण बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाएगा।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
टमाटर और खीरे को कभी भी एक साथ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से इन दोनों सब्जियों के पकने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ सकता है।
वजन कम करने के लिए अपनी डाइट में फल और सब्जियों को जरूर शामिल करें। साथ ही, साबुन अनाज भी खाएं। इनमें फाइबर होता है, जो वेट लॉस में मदद करता है।
नियमित रूप से हेल्दी डाइट न लेना, शराब व अन्य नशे करना और व्यायाम न करना पुरुषों में पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है।