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रहना है हेल्दी तो फॉलो करें ये डायट रूल्‍स

हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि हमारे दैनिक आहार में जंक फूड की मात्रा तो बढ़ी ही है, हमने नमक, चीनी और फैट भी ज्या दा लेना शुरू कर दिया है। पर अगर आप अपने दैनिक आहार में पौष्टिकता बरकरार रखना चाहते हैं तो कुछ खास बातों का ध्याकन रखना भी जरूरी है।

रहना है हेल्दी तो फॉलो करें ये डायट रूल्‍स
हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि हमारे दैनिक आहार में जंक फूड की मात्रा तो बढ़ी ही है, हमने नमक, चीनी और फैट भी ज्या दा लेना शुरू कर दिया है। पर अगर आप अपने दैनिक आहार में पौष्टिकता बरकरार रखना चाहते हैं तो कुछ खास बातों का ध्याकन रखना भी जरूरी है। ©Shutterstock.

Written by Yogita Yadav |Published : March 10, 2019 7:26 PM IST

परंपरागत भारतीय खानपान के स्थान पर आधुनिक और पाश्चात्य शैली पर आधारित रेडी-टू-ईट, पैकेज्ड या डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, जंक फूड और फास्ट फूड के सेवन से हमारे शरीर में हानिकारक तत्वों की वृद्धि होती है। जंक फूड और फास्ट फूड में ट्रांसफैट, शुगर, सोडियम और लेड जैसे खतरनाक रसायनों का प्रयोग कर उसे टेस्टी तो बनाया जाता है, लेकिन वह हेल्दी नहीं रह जाता।

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ये हैं खानपान की खराब आदतें

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इससे मनुष्य की भूख तत्काल तो मिट जाती है, परन्तु शरीर की पोषण से संबंधित जरूरतों की पूर्ति नहीं हो पाती। इसमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स आदि पोषक तत्वों का अभाव होता है। नुकसान की बात करें, तो इसमें ट्रांसफैट, सिंथेटिक कलर, एसेन्स के रूप में रासायनिक पदार्थों और शुगर की काफी मात्रा होती है। इसमें फाइबर का अभाव और चिकनाई की अधिकता होने के कारण इसके सेवन से पाचन तंत्र भी बुरी तरह से प्रभावित होता है।

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बढ़ रहा है इन बीमारियों का खतरा

आवश्यक पोषक तत्वों के अभाव के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। नमक, तेल, चीनी और हानिकारक तत्वों की बढ़ती मात्रा के कारण मोटापा, शुगर, ब्लडप्रेशर, कैंसर, किडनी, कब्ज, लिवर जैसी अनेक बीमारियां बड़े पैमाने पर हो रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 60-70 प्रतिशत बीमारियां मनुष्य की अनियमित दिनचर्या, असंतुलित एवं असुरक्षित खान-पान के कारण होती हैं। वैज्ञानिक सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि मनुष्य अपने दैनिक खानपान में शारीरिक आवश्यकताओं की तुलना में लगभग दोगुना नमक, तेल, और चीनी का सेवन करता है।

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फॉलो करें ये रूल

महानगरों में भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के तनाव के कारण युवा घर पर निर्मित खाद्य पदार्थों के सेवन की बजाय मार्केट में उपलब्ध रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों का सेवन कर भोजन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। परन्तु होटल और टिफिन वाले भोजन में पौष्टिकता की बजाय स्वाद पर बल दिया जाता है। इसीलिए स्वाद और फैशन के चक्कर में खाद्य पदार्थों के निर्माण में टेस्ट मेकर, हानिकारक रसायनों, सिंथेटिक कलर, वसा, शुगर, ट्रांस फैट आदि का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। हम स्वाद के चक्कर में यह भूल ही जाते हैं कि ऐसे भोजन के सेवन से अनेक खतरनाक बीमारियां जन्म लेती हैं।

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बरतें सावधानी

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छोटी-छोटी सावधानी बरतकर देश में खाद्यजनित बीमारियों, कम पोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और मोटापे व गैर-संचारी रोगों की बढ़ती घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। मौसमी फल-सब्जियों के सेवन से शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है। दैनिक खान-पान में फोर्टीफाइड फूड के सेवन और संतुलित व सुरक्षित खाद्य सामग्री के प्रयोग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और आप खुद को अधिक स्वस्थ महसूस करते हैं।

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