जब आप किसी डॉक्टर के पास उपचार के लिए जाते हैं तो वह आपको टेबलेट, कैप्सूल और अन्य तरीकों से उपचार करते हैं। लेकिन जब उपचार के लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह सबसे पहले यह देखते हैं कि आपके शरीर का वात, पित्त, कफ दोष संतुलन में है या नहीं। इन तीनों दोषों में जो भी असंतुलित होता है उसे संतुलित करने के लिए आहार में परिवर्तन करते हैं और साथ ही औषधियों के माध्यम से उपचार करते हैं। यदि वात, पित्त, कफ दोष सामान्य रूप से असंतुलित है तो आप सही आहार का चुनाव करके उन्हें संतुलित किया जा सकता है। असंतुलित वात दोष (Vata Dosha Imbalance) को संतुलित करने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए (Vata Dosha Diet) इसके बारे में हम आपको यहां विस्तार से बता रहे हैं। लेकिन इससे पहले यह भी जानना जरूरी है कि वह तो दोस्त असंतुलित होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखाई देते हैं?
वात दोष क्या है और इसके लक्षण - Vata Dosha Symptoms In Hindi
वात दोष 'वायु' और 'आकाश' दो प्रमुख तत्वों से मिलकर बना है। वात दोष (Vata Dosha) सबसे महत्व पूर्ण माना गया है। शरीर के अंदर होने वाली अधिकांश क्रियाओं में वात की ही भूमिका होती है। वात दोष के लक्षण निम्नलिखित हैं:
शरीर में अत्यधिक रूखापन
शरीर का दुबला होना
नींद की कमी
धीमी और भारी आवाज
शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता का भाव
अचानक क्रोधित हो जाना, डर जाना, चिड़चिड़ापन
बातों को समझ कर भूल जाना
वात दोष को संतुलित करने वाले आहार - Vata Dosha Diet Chart In Hindi
वात दोष में क्या खाएं - Vata Dosha Me Kya Khaye
फल: मीठे फल, केला, नारियल, खजूर, ताजे अंजीर, आम, मीठे अंगूर, खरबूजा, संतरा, पपीता, अनानास, भीगी हुई किसमिस और मूंगफली सेवन कर सकते हैं।
सब्जियां: पकाई हुई सब्जियां, पकाया हुआ प्याज, मेथी, अंकुरित बीज, गाजर, खीरा, कद्दू, मूली, लहसुन आदि।
मूंग दाल, सभी प्रकार के चावल और गेहूं। इसके अलावा सभी प्रकार के मसाले जैसे- हींग, इलायची, तुलसी, काली मिर्च, अदरक, पुदीना, नींबू, आम का अचार आदि।
सभी प्रकार के दूध, मक्खन, छाछ, पनीर, आइसक्रीम, दही आदि। सभी प्रकार के फलों के जूस।
वात दोष में क्या ना खाएं - Vata Dosha Me Kya Na Khaye
अधिक मात्रा में फल का सेवन खासकर सेब, नाशपाती, अनार और तरबूज।
सूखी सब्जियां, कच्ची सब्जियां, गोभी, फूल गोभी, कच्चा प्याज, मटर, शिमला मिर्च, टमाटर, मिर्च और कच्चा स्प्राउट्स।
जौ, मक्का, बाजरा, उड़द, मसूर, सोयाबीन और राजमा इनका सेवन कम करना चाहिए।
पाउडर वाला दूध, बकरी का दूध, सभी प्रकार के कार्बोनेटेड ड्रिंक, नाशपाती का रस, अनार का रस, चाय, कॉफी आदि।
(नोट: यह जानकारी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेदा से प्राप्त हुई है। वात दोष से जुड़ी अन्य जानकारी और उपचार के लिए आप अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें।)
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