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Written By: Yogita Yadav | Published : January 8, 2019 2:08 PM IST
लस से परहेज कर रहे लोगों के लिये भी खिचड़ी एक बेहद फायदेमंद आहार विकल्प होती है। इसमें मौजूद दालों, सब्जियों व चावल में ग्लूटेन नहीं होता है और सभी लोग इसका निश्चिंत होकर सेवन कर सकते हैं।
सर्दियों को पोषण का मौसम माना जाता है। इन दिनों में शरीर में वे हार्मोन सक्रिय रहते हैं जो भोजन को पचाने में मदद करते हैं। इस मौसम में खिचड़ी भी खूब खाई जाती है, खासतौर से गर्मागर्म खिचड़ी में घी डालकर खाने का तो मजा ही कुछ और है। मकर संक्रांति पर तो खिचड़ी खाने और खिलाने की भी परंपरा रही है। तो इस मौसम में आप भी बनाइए खिचड़ी और घी के साथ इस हेल्दी कॉम्बीनेशन से सेहत को दीजिए ये लाभ।
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खास है घी-खिचड़ी
यूं तो खिचड़ी को कई प्रकार से बनाया जा सकता है, लेकिन मूंग दाल की खिचड़ी एक प्रचलित व बेहद पौष्टिक डिश होती है। इसे बहुत ही आसानी से और कम समय में बनाया जाता है। स्वाद ही नहीं खिचड़ी सेहत के गुणों से भी भरपूर होती है। इसलिये जब कोई बीमार हो जाता है तो डॉक्टर भी उसे सुपाच्य मूग दाल की खिचड़ी खाने की ही सलाह देते हैं। खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश होती है। साथ ही इसकाधार्मिक महत्व भी है और उत्तर भारत में मकरसंक्रान्ति के पर्व पर मूंग दाल की खिचड़ी बनाई जाती है।
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पोषण से भरपूर
खिचड़ी एक पौष्टिक भोजन है, जिसमें पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है। चावल, दाल और घी का संयोजन आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम प्रदान करता है। कई लोग इसके पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए इसमें सब्जियां भी मिला देते हैं।
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पचाने में आसान
खिचड़ी पेट और आंतों को स्मूथ बनाती है। सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से यह बच्चों और बुजुर्ग दोनों के लिये बेहतर भोजन है।
त्रिदोषिक आहार
खिचड़ी आयुर्वेदिक आहार का एक मुख्य भोजन है, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वात्त, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है। यह क्षमता ही खिचड़ी को त्रिदोषिक आहार बनाती है। शरीर को शांत व डीटॉक्सीफाई करने के अलावा खिचड़ी की सामग्री में ऊर्जा, प्रतिरक्षा और पाचन में सुधार करने के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है।
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ग्लूटेन मुक्त आहार
ग्लूटेन अर्थात लस से परहेज कर रहे लोगों के लिये भी खिचड़ी एक बेहद फायदेमंद आहार विकल्प होती है। इसमें मौजूद दालों, सब्जियों व चावल में ग्लूटेन नहीं होता है और सभी लोग इसका निश्चिंत होकर सेवन कर सकते हैं।
कॉम्बिनेशन में बनाएं
प्रोटीन से भरी दाल में एक प्रकार का अमिनो एसिड नहीं होता इसलिए केवल दाल का सेवन न कर दाल-चावल या खिचड़ी के रूप में खाएं। खिचड़ी कॉम्बिनेशन में सेवन करने से यह कम्प्लीट प्रोटीन बन जाता है।
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धार्मिक महत्व
खिचड़ी बनने की परंपरा को भगवान शिव का अंश माने जाने वाले बाबा गोरखनाथ ने शुरू किया। माना जाता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते और कमज़ोर होते जा रहे थे। इस समस्या का समाधान बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पका कर निकाला। यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था। इससे शरीर को तुरंत उर्जा मिलती और फिर बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा।