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खराब डाइजेशन तमाम तरह की बीमारियों की वजह बनता है। जब आप खाना ठीक तरह से नहीं पचता है तो उससे मिलने वाले पोषक तत्व भी शरीर को पोषण नहीं प्रदान कर पाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने डाइजेशन को ठीक रखें। डाइजेशन खराब रहने के कई कारण होते हैं उनमें सबसे प्रमुख कारण है आपका भोजन करने का तरीका। जवाब सही तरीके से भोजन नहीं करते हैं तो उस स्थिति में आपका डाइजेशन धीरे-धीरे खराब होने लगता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट दीक्षा भावसार ने डाइजेशन को ठीक रखने के लिए 4 गोल्डन रूल बताए हैं जिसे फॉलो कर आप भी अपने डाइजेशन में सुधार कर सकते हैं।
आयुर्वेद में 6 स्वादों का जिक्र किया गया है। मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला। यह शरीर की ऊर्जा को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। इंसानों को अपने भोजन में शामिल करके शरीर को एक बायोडायवर्स एनर्जेटिक पैलट प्राप्त होता है।
सोने के दौरान हमारा शरीर मरम्मत का कार्य करता है, जबकि हमारा मन विचारों भावनाओं और अनुभवों को डाइजेस्ट करता है। यदि शरीर की ऊर्जा को शारीरिक पाचन में बदल दिया जाता है तो शारीरिक उपचार और मानसिक पाचन प्रक्रिया रुक जाती है इस कारण आयुर्वेद की सलाह है कि इस असंतुलन से बचने के लिए रात का भोजन हल्का होना चाहिए और सोने से 3 घंटे पहले किया जाना चाहिए।
चाय न केवल एक बेहतरीन ड्रिंक है बल्कि यह बॉडी को हील भी करता है। हालांकि, चाय का सेवन आधा कप से ज्यादा नहीं करना चाहिए। हर्बल चाय बॉडी को डिटॉक्स करता है और पाचन अग्नि को बढ़ाता है। जब आप भोजन करते हैं उसके कुछ देर बाद आप हर्बल चाय पी सकते हैं। इससे डाइजेशन बेहतर होता है।
जब सूर्य अपने पीठ पर होता है तो शरीर की अग्नि सबसे मजबूत होती है और दोपहर में दिन का सबसे बड़ा भोजन करने से इसका फायदा मिलता है। यह भोजन पचने में आसान होता है और आयुर्वेद के हिसाब से सही भी है।