
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : September 9, 2024 4:01 PM IST
Pulses good for cholesterol : भारतीय व्यंजनों में दाल को प्रमुख रूप से जोड़ा जाता है। दाल भारतीय रसोई में मौजूद सबसे खास सामग्री होती है। इसे आप कई तरह से अपने डिश में शामिल कर सकते हैं। दाल बनाने से लेकर इसे साग, पराठे जैसी चीजों में भी शामिल किया जाता है। लेकिन कुछ लोग शरीर में होने वाली समस्याओं को चलते दाल खाने से इग्नोर करते हैं। मुख्य रूप से यूरिक एसिड की परेशानी से जूझ रहे लोगों को दाल का कम सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर आपको कोलेस्ट्रॉल की परेशानी है, तो आप अपनी इस परेशानी को कम करने के लिए खास तरह की दाल को अपने आहार में जोड़ सकते हैं। जी हां, इस खास दाल को अपने आहार में जोड़ने से काफी हद तक कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए कौन सी दाल का सेवन करना चाहिए?
शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए मूंगदाल का सेवन करना काफी हेल्दी साबित हो सकता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम किया जा सकता है। साथ ही यह हार्ट डिजीज के जोखिमों को भी कम कर सकता है। इतना ही नहीं, अगर आप डायबिटीज की परेशानी से जूझ रहे हैं, तो मूंग की दाल का सेवन करें।
इसमें प्रोटीन की काफी अच्छी मात्रा होती है, जो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा यह शरीर के बढ़ते वजन को कंट्रोल करने में भी प्रभावी साबित हो सकता है। इसमें विटामिन बी का काफी अच्छा सोर्स है, जो पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करता है। आप इसे रोजाना भिगोकर भी खा सकते हैं।
मसूर की दाल का सेवन करने से आपके शरीर में बढ़ते कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम किया जा सकता है। इसकी मदद से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम और गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ावा मिल सकता है। कुछ आंकड़ों से पता चलता है कि प्रतिदिन 130 ग्राम दाल खाने से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 5% को कम किया जा सकता है।
दालों में प्रोटीन और फाइबर की काफी अच्छी मात्रा होती है। ये कई तरीकों से ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकते हैं। साथ ही इसमें घुलनशील और अघुलनशील फाइबर होते हैं, जो आंतों में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम करने में सहायता करते हैं, जबकि वे बड़ी आंत में लाभकारी आंत बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं।