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भरी जवानी में नहीं होगी भूलने की बीमारी अगर खाने में जीरा और चाय में दालचीनी का करेंगे इस्तेमाल, जानें कैसे होगा फायदा

इस लेख में हम आपको ऐसे 2 मसालों के बारे में बता रहे हैं, जो डिमेंशिया और अल्जाइमर के खतरे को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं ये 2 मसाले।

भरी जवानी में नहीं होगी भूलने की बीमारी अगर खाने में जीरा और चाय में दालचीनी का करेंगे इस्तेमाल, जानें कैसे होगा फायदा
भरी जवानी में नहीं होगी भूलने की बीमारी अगर खाने में जीरा और चाय में दालचीनी का करेंगे इस्तेमाल, जानें कैसे होगा फायदा

Written by Jitendra Gupta |Published : December 22, 2021 1:49 PM IST

एक उम्र के बाद हमारा दिमाग काम करना कम कर देता है, इस बात को हम सभी जानते ही हैं लेकिन जब कम उम्र में ये परेशानी आपको परेशान करने लगे तो आपको चीजों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। जब कम उम्र में दिमागी संतुलन बिगड़ने लगे तो आप अल्जाइमर जैसे रोग का शिकार हो सकते हैं, जो डिमेंशिया का एक प्रकार है। इस स्थिति में याददाश्त कम हो जाना, बोलने में दिक्कत, परेशानियों को सुलझाने की क्षमता और दूसरी चीजें शामिल हैं। ये स्थिति बुजुर्गों को परेशान करती हैं लेकिन मौजूदा वक्त में ये युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है।

ये स्थिति उम्र के साथ विकसित होती है और 30 से 40 साल की उम्र में डिमेंशिया का कारण बनती है। इसके लक्षण आपको बढ़ती उम्र में ही दिखते हैं। हालांकि अभी तक शोधकर्ता इस स्थिति से निपटने के लिए कोई इलाज नहीं ढूंढ पाए हैं, लेकिन जोखिम कारक हमेशा अलग-अलग तरीकों से कम किए जा सकते हैं। अगर आप अपनी डाइट से लेकर एक्सरसाइज तक, कई चीजों में बदलाव कर अल्जाइमर रोग के जोखिम को कम कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको ऐसे 2 मसालों के बारे में बता रहे हैं, जो इस खतरे को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं ये 2 मसाले।

जीरा और दालचीनी हैं खास

जैसा कि हम जानते हैं कि हमारी रसोई में दो चीजों का इन दिनों ज्यादा रोल है और वो हैं, जीरा और दालचीनी। ये दोनों ही अलग-अलग प्रकार के मसाले हैं, जिनका इस्तेमाल फूड्स को तैयार करने में किया जाता है। जीरा एक प्रकार का बीज है, तो दूसरा छाल। दोनों ही स्वाद में अलग-अलग होते हैं और दोनों में ही पोषक तत्वों की मात्रा भी अलग-अलग होती है। हां, दोनों में एक चीज सामान्य है और वो है पॉलीफेनोल्स। दोनों मसाले पॉलीफेनोल से संपन्न होते हैं, जो याददाश्त बढ़ानेसे लेकर दिमाग के हेल्दी कामकाज में मदद करते हैं।

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क्यों जरूर होते हैं पॉलीफेनोल्स

शोध बताते हैं कि पॉलीफेनोल्स में दिमाग की नसों को साफ करने और सूजन को कम करने की क्षमता होती है। ये यौगिक याददाश्त में कमी और अल्जाइमर जैसी स्थितियों को रोकने का काम करता है। शोध बताते हैं कि पॉलीफेनोल्स में चोट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। इतना ही नहीं न्यूरोटॉक्सिन बढ़ाता है, याददाश्त दुरुस्त करता है, सीखने की क्षमता को बेहतर बनाता है और दिमागी कार्य को करने की क्षमता प्रदान करता है।

इन सबके अलावा इन दोनों मसालों में पाया जाने वाला ये तत्व ब्लड प्रेशर लेवल को कंट्रोल करता है, रक्त वाहिकाओं को हेल्दी रखता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इतना ही नहीं ये पुरानी से पुरानी सूजन या जलन और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के साथ-साथ ह्रदय समस्याओं के खतरे को कम करता है।

डिमेंशिया के खतरे को कम करने वाले अन्य कारक

30 से 40 की उम्र में किए जाने वाले ये बदलाव आपको डिमेंशिया से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, आप समय के साथ बढ़ने वाली इन समस्याओं को रोकने के लिए ये 6 काम कर सकते हैंः

1-हेल्दी खाना खाएं

2-एक्सरसाइज करें

3-पजल सुलझाएं

4-किबातें पढ़ें

5-तनाव न लें

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6-खुश रहें

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