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आजकल डायट और फिटनेस कॉन्शियस लोग नो कार्ब्स या लो कार्बोहाइड्रेट डायट पर अमल कर रहे हैं। फिटनेस गुरु इसके कई फायदे गिनवाते हैं। पर क्या आपको पता है कि भारतीय परंपराओं में उपवास में जिस फलाहार का सेवन किया जाता है वह वास्तव में नो कार्ब्स डायट से बहुत पहले ही और बहुत उन्नत फॉर्मूला है। इससे शरीर से विषैले पदार्थ तो बाहर निकलते ही हैं, शरीर के लिए उपयोगी अन्य पाचक रस बनाने में भी मदद मिलती है।
क्या है लो या नो कार्ब्स डायट
हमारे पूरी डाइट मे 3 सबसे ज्यादा बॉडी मे लिए जाने वाले पोषक तत्व मे से एक है Carbohydrate जिसे हम कर्ब भी कहते है। यह हमारे शरीर को ऊर्जा देने वाला पहला स्रोत है। कर्ब हमे चावल और अनाज से मिलता है। अगर हम लो कर्ब डाइट का इस्तेमाल करते है तो यह वजन कम करने मे बहुत ही फायदेमंद है। यह वजन कम भी कम करता है और साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल भी कम करने मे मदद करता है।
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जब हम लो कर्ब डाइट प्लान को फॉलो करते है तो हमारी बॉडी को पूरी एनर्जी नही मिल पाती, जिसके चलते हमारा शरीर स्किन के अंदर जमा हुए फैट को एनर्जी के रूप मे इस्तेमाल करने लगता है। इसको हम कटोलिस्स स्टेट कहते है। हर इंसान को 130 से 300 ग्राम तक कर्ब की जरूरत होती है जो की कद, वजन और आयु के हिसाब से तय की जाती है।
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जानें क्या है फलाहार
उपवास में भी अन्न के सेवन का परहेज किया जाता है। इसमें सभी व्यंजन फलों और वनस्पतियों से प्राप्त सामग्री से बनाए जाते हैं। इसमें कुट्टू का आटा,समा के चावल , लौकी की खीर आदि बनाई जाती है। हालांकि कुट्टू को अनाज की तरह प्रयोग में लिया जाता है परन्तु यह बड़ी पत्तियों वाली रूबार्ब प्रजाति के एक पौधे का बीज है। इसका वानस्पतिक नाम फेगोपाइरम एस्कुलेन्टम (Fagopyrum esculentum) है। हालांकि यह अनाज नहीं है, लेकिन यह अनाज की तरह ही प्रयोग किया जाता है। पोष्टिकता के हर मापदंड में यह गेहूं, चावल, मक्का आदि से उत्कृष्ट है।
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वहीं खीर और पुलाव में इस्तेमाल किए जाने वाले समा के चावल भी चावल न होकर राजगीरा की तरह एक घास के बीज है, जो चावल के खेतों में अपने आप उग आते हैं| चावल की तरह ही इसे भी ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है| यह अनाज नहीं है , पर अनाज की तरह ही पोषण और शक्ति प्रदान करता है| इसमें पाचन में मदद करने वाले फाइबर विद्यमान है| डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे खा सकते है|