Sign In
  • हिंदी

लो कार्ब्‍स डायट का भारतीय फॉर्मूला है ‘फलाहार’

भारतीय परपंरा में उपवास में अन्‍न की जगह केवल फलों और वनस्‍पति से प्राप्‍त सामग्री के ही बनाए जाते हैं पकवान। © Shutterstock

भारतीय परपंरा में उपवास में अन्‍न की जगह केवल फलों और वनस्‍पति से प्राप्‍त सामग्री के ही बनाए जाते हैं पकवान।

Written by Yogita Yadav |Updated : October 11, 2018 9:44 AM IST

आजकल डायट और फि‍टनेस कॉन्शियस लोग नो कार्ब्‍स या लो का‍र्बोहाइड्रेट डायट पर अमल कर रहे हैं। फि‍टनेस गुरु इसके कई फायदे गिनवाते हैं। पर क्‍या आपको पता है कि भारतीय परंपराओं में उपवास में जिस फलाहार का सेवन किया जाता है वह वास्‍तव में नो कार्ब्‍स डायट से बहुत पहले ही और बहुत उन्‍नत फॉर्मूला है। इससे शरीर से विषैले पदार्थ तो बाहर निकलते ही हैं, शरीर के लिए उपयोगी अन्‍य पाचक रस बनाने में भी मदद मिलती है।

क्‍या है लो या नो कार्ब्‍स डायट  

हमारे पूरी डाइट मे 3 सबसे ज्यादा बॉडी मे लिए जाने वाले पोषक तत्व मे से एक है Carbohydrate जिसे हम कर्ब भी कहते है। यह हमारे शरीर को ऊर्जा देने वाला पहला स्रोत है। कर्ब हमे चावल और अनाज से मिलता है। अगर हम लो कर्ब डाइट का इस्तेमाल करते है तो यह वजन कम करने मे बहुत ही फायदेमंद है। यह वजन कम भी कम करता है और साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल भी कम करने मे मदद करता है।

Also Read

More News

यह भी पढ़ें -स्‍वास्‍थ्‍य के दुश्मनों से लड़ता है उपवास, अपनाएं यह विधि

जब हम लो कर्ब डाइट प्लान को फॉलो करते है तो हमारी बॉडी को पूरी एनर्जी नही मिल पाती, जिसके चलते हमारा शरीर स्किन के अंदर जमा हुए फैट को एनर्जी के रूप मे इस्तेमाल करने लगता है। इसको हम कटोलिस्स स्टेट कहते है। हर इंसान को 130 से 300 ग्राम तक कर्ब की जरूरत होती है जो की कद, वजन और आयु के हिसाब से तय की जाती है।

यह भी पढ़ें - नवरात्रि में रहना चाहते हैं फि‍ट, तो फॉलों करें ये टिप्‍स

जानें क्‍या है फलाहार

उपवास में भी अन्‍न के सेवन का परहेज किया जाता है। इसमें सभी व्‍यंजन फलों और वन‍स्‍पतियों से प्राप्‍त सामग्री से बनाए जाते हैं। इसमें कुट्टू का आटा,समा के चावल , लौकी की खीर आदि बनाई जाती है। हालांकि कुट्टू को अनाज की तरह प्रयोग में लिया जाता है परन्तु यह बड़ी पत्तियों वाली रूबार्ब प्रजाति के एक पौधे का बीज है। इसका वानस्पतिक नाम फेगोपाइरम एस्कुलेन्टम (Fagopyrum esculentum) है। हालांकि यह अनाज नहीं है, लेकिन यह अनाज की तरह ही प्रयोग किया जाता है। पोष्टिकता के हर मापदंड में यह गेहूं, चावल, मक्का आदि से उत्कृष्ट है।

यह भी पढ़ें - सेहत के लिए जरूर बढ़ाएं ये पांच कदम , हरदम रहेंगे फि‍ट

वहीं खीर और पुलाव में इस्‍तेमाल किए जाने वाले समा के चावल भी चावल न होकर राजगीरा की तरह एक घास के बीज है, जो चावल के खेतों में अपने आप उग आते हैं| चावल की तरह ही इसे भी ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है| यह अनाज नहीं है , पर अनाज की तरह ही पोषण और शक्ति प्रदान करता है| इसमें पाचन में मदद करने वाले फाइबर विद्यमान है| डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे खा सकते है|

Total Wellness is now just a click away.

Follow us on