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ताजा ग्रीन-टी के पत्तों को तुरंत स्टीम (भाप में उबालना) किया जाता है जिससे ये जल्दी खराब न हो। इसे सुखाकर एक स्थिर उत्पाद में तब्दील किया जाता है। ये स्टीमिंग प्रक्रिया एंजाइम से बचाव करती है। मतलब पत्तियां अपने असली हरे रंग में बनी रहें। इसमें मौजूद पॉलीफिनॉल नष्ट न हों और व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी फायदे मिल सकें, इसलिए ये क्रिया दोहराई जाती है। ग्रीन-टी से ऊलौंग-टी और फिर ब्लैक-टी बनती है।
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ग्रीन-टी के फायदे
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ग्रीन-टी लेने का सही समय
ग्रीन-टी में कैलोरी नहीं होती। इसे गर्म पानी में बिना चीनी के लिया जाता है। पूरे दिन में इसे दो से तीन कप आराम से ले सकते हैं।
बेवक्त भूख लगने पर ग्रीन-टी का सेवन किया जा सकता है। जितनी ग्रीन-टी पिएंगे, उतने लंबे समय तक भरा पेट महसूस करेंगे।
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सुबह और शाम का वक्त ग्रीन-टी पीने के लिए बेस्ट है। जिन लोगों को नींद न आने की समस्या रहती है वे शाम में इसके सेवन से बचें। इसमें मौजूद कैफीन तत्व नींद में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। सुबह में ग्रीन-टी पीना इसलिए अच्छा है, क्योंकि ये मेटाबॉलिज्म को बेहतर करती है।
खाना खाने के बाद इसे लेने की सोच रहे हैं, तो कम से कम आधे से एक घंटे का अंतर रखें। ये वो समय होता है जब मेटाबॉलिज्म रेट सबसे ज्यादा तेज होता है। ग्रीन-टी मेटाबॉलिज्म रेट को और तेज करती है और खाना पचाने में भी मदद करती है।
ग्रीन-टी गर्म पानी और ठंडे पानी दोनों ही तरह पी सकते हैं।
खाना खाने से एक या दो घंटे पहले भी इसे ले सकते हैं। बशर्ते इससे पहले आपने हल्का-फुल्का कुछ खाया हो। क्योंकि पूरी तरह खाली पेट ग्रीन-टी का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
क्यों नहीं पीनी चाहिए खाली पेट ग्रीन-टी
खाली पेट ग्रीन-टी पीने से कई लोगों को कब्ज की शिकायत हो सकती है। कैफीन का सेवन कई लोगों को एसिडिटी की समस्या देता है। नाश्ते के बाद पीना इसे ठीक है।