
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 31, 2024 9:01 PM IST
Foods for instant energy in summers:गर्मियों में धूप और उमस के कारण बहुत अधिक पसीना आता है और इसके साथ ही महसूस होती है बहुत अधिक थकान और सुस्ती। गर्मियों में लोगों को भूख भी ठीक तरीके से नहीं लगती ऐसे में लोगों को कमजोरी महसूस हो सकती है। टेम्परेचर बढ़ जाने की वजह से लोगों के शरीर में पानी की कमी हो सकती है और डिहाइड्रेशन से आपकी थकान और कमजोरी बढ़ सकती है।
गर्मियों में कमजोरी और थकान से बचने के लिए लोगों को पौष्टिक फूड्स खाने की जरूरत पड़ती है। साथ ही उन्हें ऐसे फूड्स का सेवन करना चाहिए जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी की कमी ना होने दें। ऐसे में प्रोटीन के लिए स्मूदी, ग्रिल्ड चिकन और दालों का सेवन कर सकते हैं। वहीं, इसके साथ ही आप गर्मियों में एनर्जी से भरपूर इन फूड्स का सेवन करें जो आपको इंस्टैंट एनर्जी देते हैं।
आप पेट भरने के साथ-साथ इंस्टैंट एनर्जी के लिए दलिया और अन्य तरह के साबुत अनाजों का सेवन कर सकते हैं। इन अनाजों में बीटा-ग्लूकेन और एमाइलोज पाए जाते हैं। ये शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं और वह ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करने में मदद होती है।
इंस्टैंट एनर्जी और मूड को रिफ्रेश करने के लिए आप डार्क चॉकलेट का भी सेवन कर सकते हैं। इससे आपको देर तक भूख नहीं लगती और यह आपको इंस्टैंट एनर्जी (Instant energy) देकर सुस्ती दूर करता है।
गर्मियों में पेट को ठंडा रखने, भूख मिटाने और एनर्जी देने के लिए लोगों को सेब खाने की सलाह दी जाती है। सेब के फल में हेल्दी कार्ब्स, डाइटरी फाइबर और विटामिंस पाए जाते हैं। सेब खाने से इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
कॉफी आपको एनर्जी देकर रिफ्रेश करने का काम करती है। यह थकान दूर करती है जिससे आप बेहतर महसूस करते हैं। कॉफी पीने से ब्रेन को एक्टिव बनाने में मदद होती है। दरअसल, कॉफी में कैफीन पाया जाता है। कॉफी पीने से गर्मियों में होनेवाले माइग्रेन से राहत भी मिलेगी।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।