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नवरात्रि व्रत का पारण करते समय या माता को विदा करते समय घरों में सूजी का हलवा बनाने की प्रथा है। नवरात्रि में अष्टमी या नवमीं पर कन्या पूजन माता के इसी प्रसाद से किया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि माता का यह प्रसाद सेहत के लिए भी सचमुच प्रसाद ही है। जिसका आयुर्वेद एवं चरक संहिता में भी उल्लेख किया गया है।
कन्या पूजन
अष्टमी अथवा नवमीं को कन्या पूजन करते समय सूजी का हलवा बनाने की ही प्रथा है। सूजी में देसी घी और शक्कर मिलाकर बनाया गया प्रसाद हेल्दी भी होता है। हाई कैलोरीज वाला यह प्रसाद एनर्जी से भी भरपूर होता है।
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चरक संहिता में
चरक संहिता में वातरोग यानी न्यूरो वेस्कुलर डिसआर्डर (Neuro- vascular disorder) के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें पुराने सिरदर्द और तनाव का भी जिक्र है। इसकी रोकथाम के लिए ‘मधुर स्निग्ध वातशामक’ का सूत्र दिया गया है। इसके अनुसार मीठे और चिकने पकवानों के सेवन का प्रावधान है। इसके अनुसार आटा, सूजी और बेसन से बने हलवे की अपनी-अपनी खासियत है।
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सुपाच्य है
यह पचने में बहुत हल्का होता है, इसलिए इसे सर्जरी के बाद, प्रसव के बाद, कमजोरी में, बीमारी से उबरने में और कम वजन वाले लोगों को भी दिया जा सकता है। छोटे बच्चों को भी कई बार अन्न खिलाने की शुरूआत सूजी के हलवे से ही की जाती है। जिन्हें घी पचाने में मुश्किल होती है, उन्हें सूजी की खीर भी खिलाई जाती है। इसे गर्म गर्म खाने में ही लाभ होता है। ठंडा होने पर यह प्रभाव कम करने लगता है।
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हलवा बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान