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मौजूदा वक्त में बहुत से लोग लिवर में इंफेक्शन की परेशानी का शिकार हो रहे हैं, जिसके पीछे लॉन्ग कोविड की वजह बताई जा रही है। लिवर में इंफेक्शन सिर्फ एक ही बीमारी नहीं है बल्कि लिवर से जुड़ी कई परेशानियां आपके लिए घातक सिद्ध हो सकती है। इन्हीं में से एक है फैटी लिवर की परेशानी, जिसके शिकार लोगों को ये बात पता ही नहीं होती कि उन्हें ये परेशानी है क्योंकि इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। समय से लक्षणों की पहचान कर पाने की वजह से परेशानियां और ज्यादा बढ़ने लगती हैं और आप गंभीर स्थिति का शिकार हो सकते हैं। आइए बताते हैं कौन सी परेशानियां हैं ये।
एक नई स्टडी में ये सामने आया है बहुत ज्यादा शुगर और फैट खाने की वजह से होने वाली फैटी लिवर बीमारी अगर बिगड़ जाए तो दिमागी स्थिति को खराब करने का कारण बन सकती है। फ्रांस की पोटियर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है, जिसमें चूहों को दो अलग-अलग डाइट दी गई। इन दो में से एक समूह की डाइट में सिर्फ 10 फीसदी फैट था। वहीं दूसरे समूह के चूहों की कुल कैलोरी इनटेक में 55 फीसदी फैट शामिल था।
स्टडी के 16 सप्ताह बाद जब शोधकर्ताओं ने उनके लिवर और दिमागी कामकाज पर डाइट के प्रभाव की जांच की तो पाया कि जिन लोगों ने उच्च मात्रा में फैट लिया उन्हें नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज होने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और दिमागी कामकाज बिगड़ने की प्रवृति पाई गई। इतना ही नहीं ये चूहें मोटे भी पाए गए।
इतना ही नहीं नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के अलावा इन चूहों में ऑक्सीजन का लेवल भी कम पाया गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से प्रभावित चूहों की नसों में भी मोटापन पाया गया है। दरअसल जब शरीर में ऑक्सीजन पहुंचती है तो कुछ कोशिकाएं ज्यादा ऑक्सीजन लेना शुरू कर देती है, जिसकी वजह से दिमाग में सूजन आ जाती है।
वैज्ञानिकों ने पाया है कि दिमाग में रक्त प्रवाह के कम होने से दिमाग की रक्त वहिकाएंअकड़ जाती हैं, जिसकी वजह से डिमेंशिया जैसी बीमारी हो सकती है। दरअसल होता क्या है कि ऑक्सीजन की कमी से दिमाग की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और आप चीजें भूलने लगते हैं।
इस अध्ययन की मुख्य लेखक डॉक्टर अन्ना हदजीहम्बी का कहना है कि ये स्थिति बहुत चिंताजनक है क्योंकि लिवर में फैट जमा होने का प्रभाव आपके दिमाग पर भी पड़ता है, विशेषरूप से ये शुरुआत में हल्का होता है और कई साल तक धीरे-धीरे बढ़ता है और लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगती है।
उन्होंने कहा कि ये शोध डाइट में शुगर और फैट की मात्रा को कम करने पर जोर देता है, जो कि न सिर्फ मोटापे से पार पाने में मदद करेगा बल्कि आपके लिवर को भी सुरक्षित रखेगा। इस तरीके से आप दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली डिप्रेशन व डिमेंशिया जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करती है।