बदलते मौसम में पेट हो रहा है गड़बड़, तो आजमाएं ये रेसिपी

मौसमी बदलाव से होने वाली समस्‍याओं से लड़ती है यह भारतीय रेसिपी।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : July 21, 2018 3:01 PM IST

खिचड़ी भारत में आसानी से बनने वाले खाद्य पदार्थों का प्रतीक है। दाल-चावल से मिलकर बनी यह डिटॉक्स डाइट पेट को काफी आराम देती है। बदलते मौसम में अगर आपको भी पाचन संबंधी समस्‍याएं हो रही हैं, तो आप भी आजमा सकते हैं यह खास भारतीय रेसिपी।

मौसमी समस्‍याएं

मानसून के दौरान अकसर इम्‍यूनिटी कमजोर हो जाती है। खाद्य विषाक्तता, संक्रमण, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और डायरिया आदि की समस्‍याएं इन दिनों देखने में आती हैं। जिसकी सबसे बड़ी वजह बरसात के मौसम में खाद्य पदार्थों के जरिए फैलने वाला संक्रमण है।

खिचड़ी के फायदे

खिचड़ी पाचन तंत्र के लिए अत्यधिक स्वास्थ्यप्रद और आंत को आराम देती है। देसी घी के तड़के के साथ बनी मूंग की दाल और चावल में की खिचड़ी सभी मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के साथ एक हेल्‍दी डाइट है। घी और फाइबर चावल के हाई ग्लाइसेमिक को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद खिचड़ी को तीनों दोषों को संतुलित करने के लिए एक उच्‍चतम भोजन मानता है। इसको टेस्‍टी और मजेदार बनाने के लिए आप इसमें अपनी पसंदीदा सब्जियां और टमाटर भी डाल सकते हैं।

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पोषक तत्‍वों से भरपूर  

  • मूंग की दाल की खिचड़ी काफी हल्‍की होती है. आयुर्वेद में इसे परना दाल के नाम से जाना जाता है।
  • खिचड़ी में हल्दी मिलाने से यह एंटीसेप्टिक का काम करती है. एक चुटकी हल्दी को ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद कहा जाता है।
  • मूंग की दाल में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह पेट के लिए काफी हल्‍की होती है।
  • दही के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी खाने से यह आसानी से डाइजेस्‍ट हो जाती है
  • खिचड़ी पौष्टिक भोजन है. मूंग की दाल में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस पाया जाता है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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