
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 23, 2022 4:17 PM IST
Artificial Sweeteners Side effects: शक्कर या चीनी खाने से मोटापा, डायबिटीज और शरीर में विभिन्न प्रकार के इंफेक्शन्स का खतरा बढ़ सकता है इसीलिए, लोग हेल्दी रहने और इन बीमारियों से बचने के लिए शक्कर का सेवन करने से परहेज करते हैं। मिठाइयों का सेवन बंद कर देते हैं और चाय-कॉफी में शक्कर की बजाय शुगर-फ्री टैबलेट्स मिलाते हैं या अपनी स्वीट डिशेज का स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, वैज्ञानिकों का कहना है कि कृत्रिम शक्कर या आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इससे शरीर में ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ सकता है। (Artificial Sweeteners Side effects in Hindi)
साइंस जर्नल सेल (Cell) में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स ( artificial sweeteners) शरीर में सूक्ष्म जीवों के स्तर यानि बॉ़डी माइक्रोबीज सिस्टम (micro-organisms in human body) पर कुछ इस तरह का प्रभाव डालते हैं कि उससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बहुत बढ़ सकता है। जैसा कि शक्कर में ब्लैंक कैलोरीज होती है और इसीलिए इससे मोटापे का खतरा बढ़ता है। इसीलिए, लोग अक्सर उन चीजों का सेवन करना पसंद करते हैं जिनमें शक्कर की जगह उनके लो-कैलोरी विकल्पों (sugar substitutes) का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही दो पर्याय हैं-सैचरीन (saccharin) और एस्पार्टेम (aspartame) जो आमतौर पर केक, टूथपेस्ट, च्यूइंग गम, बोतलबंद ड्रिंक्स (fizzy drinks) और रेडी टू कूक मील्स में भोजन को मीठा स्वाद देने के लिए मिलाए जाते हैं। हालांकि, इन स्वीटनर्स के निर्माताओं द्वारा लम्बे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि इनके सेवन से किसी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है या उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। लेकिन, नयी स्टडी के डेटा से यह संकेत मिलते हैं कि लोगों को इनका सेवन अधिक सावधानी के साथ करना चाहिए।
स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सेवन करने के बाद गट बैक्टेरिया इन्हें प्रतिक्रिया देते हैं। इस स्थिति के चलते शरीर में ग्लाइसेमिक रिस्पॉन्स में बदलाव दिखायी दिए जो डायबिटीज से जुड़ी गड़बड़ियों की वजह बनते हैं। इसी तरह शुगर-फ्री या अन्य प्रकार की कृत्रिम शक्कर का सेवन करने से वयस्कों में ग्लूकोज टॉलरेंस (glucose tolerance) का स्तर भी प्रभावित होता हुआ दिखायी दिया।
वहीं, इससे पहले सामने आ चुकी कुछ स्टडीज में भी यह कहा गया था कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्म (metabolism) प्रभावित होता है और उन्हें भूख न लगने या बहुत अधिक भूख लगने (appetite related syndroms) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।