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शमिता शेट्टी कोलाइटिस का शिकार! अच्छी सेहत के लिए खाती हैं ग्लूटेन फ्री डाइट, जानें कितनी फायदेमंद

शमिता शेट्टी कोलाइटिस का शिकार! अच्छी सेहत के लिए खाती हैं ग्लूटेन फ्री डाइट, जानें कितनी फायदेमंद

बिग बॉस 15 की फाइनलिस्ट शमिता शेट्टी इन दिनों भले ही विवादों में हों लेकिन हाल ही में उन्होंने एक स्वास्थ्य स्थिति से पीड़ित होने की बात शेयर की थी।

Written by Jitendra Gupta |Updated : November 16, 2021 4:39 PM IST

शिल्पा शेट्टी की बहन और बॉलीवुड अभिनेत्री शमिता शेट्टी भले ही बॉलीवुड से दूर हो लेकिन हाल ही में टीवी के चर्चित रिएलटी शो बिग बॉस ओटीटी का हिस्सा रही हैं। बिग बॉस 15 की फाइनलिस्ट शमिता शेट्टी इन दिनों भले ही विवादों में हों लेकिन हाल ही में उन्होंने एक स्वास्थ्य स्थिति से पीड़ित होने की बात शेयर की थी। हालांकि उन्होंने इस स्थिति से लड़ने के लिए एक डाइट भी सुझाई थी, जिसके बारे में हम यहां आपसे बात करने वाले हैं। ये स्वास्थ्य स्थिति है कोलाइटिस, जिसे इंफ्लेमेटरी बाउल डीजिज भी कहा जाता है, जो कि हमारे पाचन तंत्र में सूजन और घावों का कारण बनता है। इतना ही नहीं ये हमारे कोलन या बड़ी आंत की आंतरिक परत को भी परेशानी में डाल देता है। इसके लक्षणों में ऐंठन, पेट में दर्द, बुखार, ठंड लगना, खूनी दस्त और अन्य पेट से जुड़ी परेशानियां भी शामिल हो सकती हैं।

ग्लूटेन-फ्री डाइट सबसे अच्छी

शमिता ने अपने फैंस के साथ अपनी बीमारी की बात शेयर की थी और इससे लड़ने के लिए एक डाइट भी फॉलो करने के बारे में कहा था, जिसे ग्लूटेन-फ्री डाइट के रूप में जाना जाता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित लोगों में ग्लूटेन सेंसिटिविटी एक बढ़ती हुई समस्या है। बीते कुछ वर्षों से अधिक लोग पाचन संबंधी परेशानियों और ग्लूटेन इनटोलरेंस के शिकार हो रहे हैं। इतना ही नहीं बहुत से लोगों में सीलिएक रोग के भी लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जो कि एक ऑटोइम्यून विकार है। ये ग्लूटेन के सेवन से अपने आप शुरू हो जाता है।

जर्नल इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, आईबीडी से पीड़ित 65 प्रतिशत रोगियों द्वारा ग्लूटेन-फ्री डाइट लेने से उनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षणों से राहत मिलती है।

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कितनी सेफ है ये डाइट?

एक्सपर्ट की मानें तो सीलिएक रोग के लक्षण और इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए ग्लूटेन फ्री डाइट लेना बहुत ही सेफ रहता है। बता दें कि ग्लूटेन डाइट की गिनती एक रिस्ट्रिक्टिव डाइट में होती है और इसमें आपको गेहूं व गेहूं से बने उत्पादों से दूरी बनानी होती है। इस कारण से आपके शरीर में कई विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। ग्लूटेन फ्री डाइट में फाइबर की मात्रा भी कम होती है, जो पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।

क्या ग्लूटेन-फ्री है मददगार?

एक्सपर्ट की मानें तो इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज के सभी रोगियों को तब तक ग्लूटेन फ्री डाइट की आवश्यकता नहीं होती जब तक कि उन्हें सीलिएक रोग या फिर ग्लूटेन सेंसिटिविटी न हो। एक्सपर्ट मानते हैं कि सभी रोगियों को बीमारी की गंभीरता को समझना जरूरी है। यही कारण है कि आईबीडी रोग में किसी भी डाइट की सलाह नहीं दी जाती है। इसके बजाए आपको अच्छी सलाह के लिए डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से मिलने की जरूरत होती है लेकिन सीलिएक रोग या ग्लूटेन इंटोलरेंस वाले किसी भी व्यक्ति को ग्लूटेन के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि आगे चलकर ग्लूटेन नुकसान पहुंचाता है और छोटी आंत में सूजन का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं ये इम्यूनिटी रिस्पॉन्स जैसे कि दस्त, सूजन, कब्ज, मतली और उल्टी के साथ-साथ वजन घटने से जुड़ी थकान का भी कारण बन सकता है।

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