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Health Benefits Of Eating Pickles In Winters: अचार और चटनी भारतीय थालियों में परोसी जाने वाली एक बहुत कॉमन -सी चीज है। खट्टे-मीठे, तीखे और मसालों में लिपटे अचार का स्वाद साधारण-सी डिशेज का स्वाद भी बढ़ा सकता है। इसीलिए, देश के हर घर में अलग-अलग तरीकों से और विभिन्न स्वाद के साथ अचार बनाए जाते हैं। अचार फूड प्रीजर्वेशन (Tradigital ways of food preservation ) का एक बेहतरीन तरीका माना जाता है क्योंकि लोग मौसम के अनुसार उपलब्ध फलों और सब्जियों का अचार बनाकर उन्हें सालभर के लिए स्टोर करते हैं।
आम (Mango), कटहल, मिर्च और नींबू जैसे फलों के अचार जहां गर्मियों के मौसम बनाए जाते हैं और धूप में सूखाए जाने की वजह से ये अचार लम्बे समय तक टिकाऊ भी साबित होते हैं। वहीं, सर्दियों के मौसम में भी आंवले, शलजम, गाजर और आंवले के अचार बनाए जाते हैं। लेकिन, सर्दियों के मौसम में तैयार किए जाने वाले अचार (Winter Pickles) को उतनी लोकप्रियता नहीं मिली जितना गर्मियों में बनाए जाने वाले अचार (Achar) की वेरायटीज को लोग पसंद करते हैं। (Health Benefits Of Eating Pickles In Winters In Hindi.)
सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिशियन रुजुता दिवेकर (Rujuta Diwekar) ने विंटर पिकल्स की खूबियों के बारे में बात की। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इस बारे में लिखा कि सर्दियों में बनाए जाने वाले अचार का सेवन सेहत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। रुजुता ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा, सर्दियों के अचार (Winter pickles) के बारे में लोगों को कम जानकारी है और लोग इन्हें कम ही आंकते हैं। इनका सेवन भी कम ही किया जाता है।
रुजुता ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि, लोगों को पता नहीं है कि सर्दियों में बनने वाले पारम्परिक अचार का सेवन करे से त्वचा से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं, गट हेल्दी बनता है और जॉइंट पेनजैसी समस्याओं से भी आराम मिलता है। रुजुता ने एक तस्वीर शेयर की जिसमें शलजम (Turnip) और फूल गोभी (Cauliflower) का अचार दिखायी दे रहा है। रुजुता ने बताया कि, इस अचार को बनाने के लिए राई (सरसों के बीजों) को कूटकर मिलाया गया है जो सर्दियों में होने वाली श्वसन प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने का एक आसान और पुराना नुस्खा (traditional therapies against respiratory disorders) भी है।
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रुजुता दिवेकर ने सलाह दी कि मौसम के हिसाब से बनने वाली पारम्परिक फूड्स का सेवन करना हेल्दी बनने में मदद कर सकता है। इस मौके पर उन्होंने यह भी सुझाया कि अब धीरे-धीरे दुनियाभर में पारम्परिक पद्धति से तैयार किए जाने वाले भोजन का महत्व समझा जा रहा है और लोगों को भी अपने घर में बनने वाले फूड्स के सेवन से कतराना नहीं चाहिए।