
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : February 25, 2020 5:09 PM IST
कूकिंग ऑयल के सेवन से जुड़ी टिप्स।
Changing Cooking Oil: कूकिंग ऑयल हेल्दी हो तो, सेहत को कम नुकसान होता है और भोजन का स्वाद भी बढ़ता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हेल्दी ऑयल का भी सेवन लगातार और बहुत लम्बे समय तक करने से नुकसान होता है। जी हां, इसीलिए डायटिशन और हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर, कुछ समय बाद कूकिंग ऑयल को बदलने सलाह देते हैं। (Changing Cooking Oil in hindi)
जैसा कि, हम सभी डीप-फ्राइड चीज़ें खाते हैं और सच तो यह है कि भारत में लोग बहुत अधिक मात्रा में तेल खाते हैं। तली हुई पूरियां, समोसे और नमकीन के अलावा हम आमतौर पर सब्ज़ी, या अन्य डिशेज़ में तड़के के लिए भी थोड़ा-ज़्यादा मात्रा में ही तेल डालते हैं। इससे, लोग अधिक मात्रा में फैट और कैलोरी का सेवन करते हैं। जो कि कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाने और दिल की बीमारियों का खतरा उत्पन्न करता है।
इसीलिए, दिल को सेहतमंद रखने के लिए सबसे पहले अपने भोजन में तेल की मात्रा को नियंत्रित करें। इसके लिए रोज़ाना 3-4 चम्मच से अधिक तेल का सेवन ना करें।इसी तरह एक ही ब्रांड का एक ही वेरायटी का कूकिंग ऑयल इस्तेमाल ना करें। हर 2-3 महीने बाद किसी नयी वेरायटी यानि किसी और तिलहन का तेल खरीदें और उसमें खाना बनाएं।
दरअसल, अलग-अलग तिलहनों में विभिन्न माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और हेल्दी फैट्स होते हैं। आमतौर पर भारतीय रसोइयों में कूकिंग के लिए सरसों, तिल, मूंगफली, सूरजमूखी या सनफ्लॉवर, सोयाबीन और नारियल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। अगर, कोई व्यक्ति या परिवार कई वर्षों तक एक ही प्रकार के कुकिंग ऑयल में खाना पकाता है तो, उसे दूसरे प्रकार के तिलहनों का फायदा और पोषक तत्व नहीं प्राप्त होगें। जैसा कि, हेल्दी फैट शरीर की कार्यप्रणालियों और दिल के कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसीलिए, इन हेल्दी फैट्स का फायदा पाने के लिए कुछ-कुछ समय बाद अपना भोजन तैयार करने के लिए किसी और तरीके का कूकिंग ऑयल प्रयोग करें।
जैसे अगर आप मूंगफली का तेल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो, 2-3 महीने बाद सनफ्लॉवर ऑयल का सेवन करें। फिर, कुछ समय बाद तिल का तेल या ऑलिव ऑयल का भी प्रयोग शुरु कर सकते हैं। आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी इस तरह का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे, अलग-अलग डिशेज़ बनाने के लिए अलग प्रकार का तेल प्रयोग में लें।