Healthy Eating: हेल्दी हार्ट और हेल्दी बॉडी के लिए बदल-बदलकर खाएं कूकिंग ऑयल, जानें क्यों है ऐसा करना ज़रूरी

जैसा कि, हम सभी डीप-फ्राइड चीज़ें खाते हैं और सच तो यह है कि भारत  में  लोग बहुत अधिक मात्रा में तेल खाते हैं।  तली हुई पूरियां, समोसे और नमकीन के अलावा हम आमतौर पर सब्ज़ी, या अन्य डिशेज़ में तड़के के लिए भी थोड़ा-ज़्यादा मात्रा में ही तेल डालते हैं। इससे, लोग अधिक मात्रा में फैट और कैलोरी का सेवन करते हैं। जो कि कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाने और दिल की बीमारियों का खतरा उत्पन्न करता है।

WrittenBy

Written By: Sadhna Tiwari | Published : February 25, 2020 5:09 PM IST

Changing Cooking Oil: कूकिंग ऑयल हेल्दी हो तो, सेहत को कम नुकसान होता है और भोजन का स्वाद भी बढ़ता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हेल्दी ऑयल का भी सेवन लगातार और बहुत लम्बे समय तक करने से नुकसान होता है। जी हां, इसीलिए डायटिशन और हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर, कुछ समय बाद कूकिंग ऑयल को बदलने सलाह देते हैं।  (Changing Cooking Oil in hindi)

सेहतमंद रहने के लिए अपना कूकिंग ऑयल बदलते रहें (Changing Cooking Oil):

जैसा कि, हम सभी डीप-फ्राइड चीज़ें खाते हैं और सच तो यह है कि भारत  में  लोग बहुत अधिक मात्रा में तेल खाते हैं।  तली हुई पूरियां, समोसे और नमकीन के अलावा हम आमतौर पर सब्ज़ी, या अन्य डिशेज़ में तड़के के लिए भी थोड़ा-ज़्यादा मात्रा में ही तेल डालते हैं। इससे, लोग अधिक मात्रा में फैट और कैलोरी का सेवन करते हैं। जो कि कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाने और दिल की बीमारियों का खतरा उत्पन्न करता है।

Olive Oil Side Effects: हेल्दी समझकर ना खाएं ज़्यादा ऑलिव ऑयल, बढ़ सकती हैं दिल की बीमारियां और डायबिटीज़

इसीलिए,  दिल को सेहतमंद रखने के लिए सबसे पहले अपने भोजन में तेल की मात्रा को नियंत्रित करें। इसके लिए रोज़ाना 3-4 चम्मच से अधिक तेल का सेवन ना करें।इसी तरह  एक ही ब्रांड का एक ही वेरायटी का कूकिंग ऑयल इस्तेमाल ना करें। हर 2-3 महीने बाद किसी नयी वेरायटी यानि किसी और तिलहन का तेल खरीदें और उसमें खाना बनाएं।

Coconut Oil: डायबिटिक्स के लिए बेहतरीन है नारियल के तेल का सेवन , ब्लड शुगर लेवल को करता है नियंत्रित

जानें क्यों नहीं खाना चाहिए एक ही तरह के तेल में बना खाना:

दरअसल, अलग-अलग तिलहनों में विभिन्न माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और हेल्दी फैट्स होते हैं। आमतौर पर भारतीय रसोइयों में कूकिंग के लिए सरसों, तिल, मूंगफली, सूरजमूखी या सनफ्लॉवर, सोयाबीन और नारियल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। अगर,  कोई व्यक्ति या परिवार कई वर्षों तक एक ही प्रकार के कुकिंग ऑयल में खाना पकाता है तो, उसे दूसरे प्रकार के तिलहनों का फायदा और पोषक तत्व नहीं प्राप्त होगें। जैसा कि, हेल्दी फैट शरीर की कार्यप्रणालियों और दिल के कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसीलिए, इन हेल्दी फैट्स का फायदा पाने के लिए  कुछ-कुछ समय बाद अपना भोजन तैयार करने के लिए किसी और तरीके का कूकिंग ऑयल प्रयोग करें।

Diet during Fasting: जानें व्रत के दौरान क्यों खाए जाते हैं मूंगफली के दानें, नवरात्री में कैसे रखते हैं ये आपको हेल्दी

जैसे अगर आप मूंगफली का तेल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो,  2-3 महीने बाद सनफ्लॉवर ऑयल का सेवन करें। फिर, कुछ समय बाद तिल का तेल या ऑलिव ऑयल का भी प्रयोग शुरु कर सकते हैं। आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी इस तरह का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे, अलग-अलग डिशेज़ बनाने के लिए अलग प्रकार का तेल प्रयोग में लें।

Clove Oil benefits: आयु्र्वेद में बताया गया है लौंग के तेल को खास, कई तकलीफों से दिलाता है आराम, जानें क्लोव ऑयल के हेल्दी फायदे

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source