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Written By: Yogita Yadav | Published : September 20, 2019 6:53 PM IST
इसमें इतने सारे पोषक तत्व हैं कि इसे सेहत का खजाना कहा जा सकता है। मड़ुआ को ही रागी कहा भी कहा जाता है। आहार विशेषज्ञ वजन घटाने के लिए इस अनाज की पैरवी करते हैं। © Shutterstock
मड़ुआ की रोटी जिसे जिउतिया पर्व पर महिलाएं खाती हैं, बहुत खास है। इसमें इतने सारे पोषक तत्व हैं कि इसे सेहत का खजाना कहा जा सकता है। मड़ुआ को ही रागी कहा भी कहा जाता है। आहार विशेषज्ञ वजन घटाने के लिए इस अनाज की पैरवी करते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं जिउतिया में खाई जाने वाली मड़ुआ यानी रागी की रोटी के लाभ।
रागी पारंपरिक अनाज है। इसे मोटे अनाजों में शुमार किया जाता है। इसमें प्रोटीन, केल्शियम, आयरन, ट्रिपटोफैन, मिथियोनिन और फाइबर मौजूद होते हैं। इसे हाई फाइबर फूड्स में काउंट किया जाता है।
मड़ुआ की रोटी यानी रागी से बनी रोगी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसे खाने से बोन हेल्थ को फायदा मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है। आहार विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें 80 फीसदी केल्शियम होता है। इसलिए 30 और इसके बाद की उम्र की महिलाओं को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
मड़ुआ की रोटी अमूमन मड़ुआ और गेंहू के आटे को मिक्स करके बनाई जाती है। इससे एनीमिया की कमी दूर होती है। महिलाओं को इस समस्या का ज्यादा सामना करना पड़ता है। माहवारी शुरू होने के बाद से अधिकांश महिलाएं खून की कमी की शिकार हो जाती हैं। इससे बचने के लिए उन्हें रागी की रोटी का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से आप चेहरे के दाग-धब्बे और बढ़ती उम्र के संकेतों से बच सकती हैं। यह एंटी एजिंग भी मानी जाती है।
रागी का इस्तेमाल सिर्फ रोटी बनाने में हीं नहीं किया जाता, बल्कि आप चाहें तो इससे और भी कई व्यंजन बना सकती हैं। आजकल रागी के बिस्कुट और कुकीज बाजार में बहुत मिलते हैं। ये डायबिटीज कंट्रोल करने में इनका सेवन किया जाता है। इसके अलावा आप मड़ुआ से डोसा, उपमा, इडली, पूड़ी, परांठा आदि भी बना सकती हैं। रागी का मीठा दलिया भी शौक से खाया जाता है।