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Written By: Atul Modi | Published : March 22, 2023 12:30 PM IST
ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज प्रोटीन, फाइबर, बी-विटामिंस और आयरन जैसे मिनरल्स से भरपूर होते हैं। ये अनाज ग्लूटन-फ्री सुपरफूड्स हैं जो डाइबिटीज को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। ग्लूटन एक तरह का प्रोटीन होता है, जो गेहूं, जौ और राई में पाया जाता है। ग्लूटन-फ्री डाइट स्वास्थ्य में सुधार लाने, वजन घटाने और एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकती है। WHO और फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने 2023 को मोटा अनाज वर्ष (International Year of Millets 2023) घोषित किया है। ज्वार, बाजरा और रागी सभी मोटा अनाज का हिस्सा हैं। आजकल अधिकतर लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से इन अनाजों को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। अगर आप भी अपने आहार में मोटे अनाज को शामिल करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको मोटा अनाज खाने (Best Way to Eat Millets) से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखना जरूरी है ताकि इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
रागी एक गर्म मोटा अनाज है, इसलिए इसका सेवन सर्दियों के मौसम में करना बेहतर माना जाता है। रागी में कैल्शियम, प्रोटीन और अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में होता है। ये चावल का एक अच्छा सब्सटीट्यूट है, इसे आसानी से दलिया में मिलाकर पकाया जा सकता है। अगर आपको मोटा अनाज खाने की आदत नहीं है, तो आहार में मोटे अनाज के तौर पर रागी को शामिल करना बेहतर माना जा सकता है, क्योंकि ये एक हल्का मोटा अनाज है। इसके बाद आप धीरे-धीरे अन्य मोटे अनाज को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
ज्वार एक ऐसा मोटा अनाज है जिसे पूरे साल आराम से खाया जा सकता है। ये प्रोटीन, आयरन, फाइबर से भरपूर होता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को दूर रखने में मदद करता है। गेहूं से बनी रोटी के स्थान पर आप ज्वार से बनी रोटियां खा सकते हैं। इस ग्लूटन फ्री अनाज को अपने आहार में शामिल करने से वजन घटाने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा ज्वार ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी सहायक होता है। ये गट और हार्ट हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है।
रागी की तरह ही बाजरा भी एक गर्म मोटा अनाज है और इसका सेवन ज्यादातर सर्दियों में ही किया जाता है। हालांकि, समर डिंग बनाने के लिए इसे कूलिंग एजेंट्स के साथ मिक्स किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक रिफ्रेशिंग समर ड्रिंक बनाने के लिए बाजरा आटे को बटरमिल्क के साथ मिलाया जा सकता है। अन्य मिलेट्स की तरह ही बाजरा का नियमित सेवन करने से वजन घटाने और डायबिटीज को मैनेज करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही बाजरा का नियमित सेवन बालों, नाखून और त्वचा को स्वस्थ बनाता है।
मोटे अनाज का सेवन धीरे-धीरे बढ़ाया जाना चाहिए। एकदम से अधिक सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। मोटे अनाज को धीरे-धीरे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए और किसी भी प्रकार की पाचन संबंधी परेशानी से बचने के लिए, अनाजों को किसी भी प्रकार के व्यंजन में उपयोग करने से पहले पानी में भिगोकर फुला लेना चाहिए। खाने से पहले बाजरा को भिगोना, अंकुरित करना या फर्मेंटिंग करना महत्वपूर्ण होता है, नहीं तो इनमें मौजूद फाइटिक एसिड अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण को कम कर सकता है।
हाइपोथायरायडिज्म की समस्या से पीड़ित लोगों को मोटा अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें गोइट्रोजेन होता है जो आयोडीन के अवशोषण में बाधा उत्पन्न कर सकता है। खाना पकाने की प्रक्रिया में गोइट्रोजेन की मात्रा को कम तो किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता।
ज्वार, बाजरा और रागी का उपयोग गेहूं से बने उत्पादों जैसे रोटी, बन, बिस्किट और केक के बदले किया जा सकता है। बेहतर परिणाम के लिए, केवल एक प्रकार के मोटे अनाज का दैनिक सेवन करने के बजाय अलग-अलग दिन अलग-अलग प्रकार के मोटे अनाज का उपयोग करना बेहतर होगा।