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क्या गट के लिए फायदेमंद है प्रोबायोटिक्स? जानें शरीर में कैसे करता है काम

गट हेल्थ को बूस्ट करने के लिए प्रोबायोटिक्स काफी जरूरी है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह हमारे शरीर के लिए किस तरह कार्य करता है? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 30, 2026 3:36 PM IST

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Medically Verified By: Swetha. A

Probiotics for Gut Health : क्या प्रोबायोटिक्स हर किसी के लिए जरूरी हैं? क्या आपके मन में यह सवाल कभी आया है? अगर नहीं, तो एक बार जरूर इस बारे में जानें। हम में से कई लोग पाचन तंत्र को सिर्फ खाना पचाने वाला अंग समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। यह इम्यूनिटी, मेंटल हेल्थ, पोषक तत्वों के अवशोषण और संपूर्ण हेल्थ के प्रति अहम भूमिका निभाता है। मालूम हो कि हमारे आंतों में काफी ज्यादा सूक्ष्मजीव होते हैं, जिनमें अच्छे और बुरे दोनों तरह के बैक्टीरिया शामिल होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो गैस, कब्ज, दस्त, पेट फूलना और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

ऐसे में अक्सर प्रोबायोटिक्स का नाम सामने आता है। इन्हें गुड बैक्टीरिया कहा जाता है, क्योंकि ये आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या और संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। अब सवाल ये है कि क्या प्रोबायोटिक्स हर किसी के लिए जरूरी हैं? क्या ये सच में पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं? आइए इस विषय के बारे में हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की डिप्टी चीफ डाइटीशियन श्वेता ए से विस्तार से समझते हैं-

क्या हैं प्रोबायोटिक्स?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से लाभकारी बैक्टीरिया और कुछ प्रकार के यीस्ट शामिल होते हैं। जब इन्हें पर्याप्त मात्रा में लिया जाता है, तो ये शरीर को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा सकते हैं। सबसे आम प्रोबायोटिक ग्रुप्स  में लैक्टोबैसिलस, बाइफिडोबैक्टीरियम और सैकरोमाइसीज बोलार्डी शामिल हैं।

Swetha A Swetha A

हालांकि, सभी प्रोबायोटिक्स एक जैसे नहीं होते हैं। अलग-अलग स्ट्रेन शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं। इसलिए किसी एक प्रोबायोटिक से मिलने वाला फायदा दूसरे प्रोबायोटिक से जरूरी नहीं कि मिले

गट माइक्रोबायोम क्या है और क्यों है ये जरूरी?

हमारी आंतों में लगभग खरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। इनमें बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और अन्य सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं। ये न सिर्फ खाना पचाने का काम करते हैं, बल्कि कई तरह के कार्यों में भी मददगार साबित हो सकते हैं, जैसे-

  1. भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद कर सकते हैं।
  2. कुछ जरूरी विटामिन बनाने में भूमिका निभाते हैं।
  3. हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करते हैं।
  4. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
  5. आंतों की सुरक्षा परत को बनाए रखते हैं।

जब इस माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है, तो गैस, कब्ज, दस्त, पेट फूलना और कुछ अन्य पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

प्रोबायोटिक्स शरीर में कैसे काम करते हैं?

NIH रिसर्च के मुताबिक, प्रोबायोटिक्स कई तरीकों से काम कर सकते हैं। ये आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और कुछ मामलों में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को कम कर सकते हैं। इनके कुछ  कार्य निम्न हैं-प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करना

  • अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाना
  • रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से प्रतिस्पर्धा करना
  • आंतों की सुरक्षा परत को मजबूत करना
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करना
  • कुछ उपयोगी बायोएक्टिव कंपाउंड्स बनाना

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि हर प्रोबायोटिक स्ट्रेन का प्रभाव अलग होता है। इसलिए सभी सप्लीमेंट्स एक जैसा परिणाम नहीं देते।

क्या प्रोबायोटिक्स वास्तव में पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं?

कई क्लीनिकल स्टडीज में पाया गया है कि कुछ विशेष प्रोबायोटिक स्ट्रेन एंटीबायोटिक लेने के बाद होने वाले दस्त (Antibiotic-associated diarrhea) के जोखिम को कम कर सकते हैं। यही कारण है कि कुछ डॉक्टर विशेष परिस्थितियों में प्रोबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं। हालांकि, हर प्रकार की पाचन समस्या में प्रोबायोटिक्स समान रूप से प्रभावी हों, इसके पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

क्या प्रोबायोटिक्स इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं?

डायटीशियन का कहना है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा आंतों से जुड़ा होता है। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम इम्यून सिस्टम के सामान्य कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि कुछ विशेष प्रोबायोटिक स्ट्रेन प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह कहना कि हर प्रोबायोटिक इम्यूनिटी बढ़ाता है, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा क्योंकि इसका प्रभाव स्ट्रेन और व्यक्ति दोनों पर निर्भर करता है।

क्या प्रोबायोटिक्स मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़े हैं?

हाल के वर्षों में गट ब्रेन एक्सिस पर काफी रिसर्च हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आंत और ब्रेन के बीच लगातार कम्युनिकेशन होता रहता है। कुछ शुरुआती रिसर्च से संकेत मिले हैं कि स्वस्थ गट माइक्रोबायोम  मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और मूड को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस क्षेत्र में अभी और बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स की जरूरत है, इसलिए इसे स्थापित उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स में क्या अंतर है?

अक्सर लोग प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग होते हैं। प्रोबायोटिक्स गुड बैक्टीरिया हैं। वहीं, प्रीबायोटिक्स ऐसे न पचने वाले फाइबर होते हैं, जो इन अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रोबायोटिक्स गुड बैक्टीरिया हैं और प्रीबायोटिक्स उनका खाना हैं दोनों मिलकर आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

Probiotics Probiotics

प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड्स कौन-कौन से हैं?

अगर आप बिना सप्लीमेंट के आंतों की सेहत बेहतर रखना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड्स शामिल करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इनमें गुड बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं। इसमें दही, छाछ, केफिर, किमची, सॉरक्राउट,  मिसो (Miso), टेम्पेह और  कुछ बिना पाश्चुरीकृत फर्मेंटेड फूड्स, इत्यादि होते हैं।  ध्यान रखें कि हर फर्मेंटेड फूड में जीवित प्रोबायोटिक्स मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। कुछ प्रोसेसिंग टेक्नीक के कारण लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट भी हो सकते हैं।

प्रीबायोटिक फूड्स भी उतने ही जरूरी हैं

सिर्फ प्रोबायोटिक्स लेने से ही काम नहीं चलता। यदि अच्छे बैक्टीरिया को पर्याप्त भोजन नहीं मिलेगा, तो वे लंबे समय तक एक्टिव नहीं रह पाएंगे। इसलिए प्रीबायोटिक्स से भरपूर भोजन भी जरूरी है। इसके लिए आपको अपने आहार में केला, लहसुन, प्याज, ओट्स,  साबुत अनाज, राजमा और अन्य दालें जैसी चीजों को शामिल करने की जरूरत होती है। डायटीशियन का कहना है कि फाइबर से भरपूर भोजन आंतों के माइक्रोबायोम को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।Probiotics Foods

क्या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेना जरूरी है?

हर व्यक्ति को प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने की जरूरत नहीं होती। यदि आपकी डाइट संतुलित है और आप नियमित रूप से दही, छाछ और अन्य फर्मेंटेड फूड्स खाते हैं, तो कई लोगों के लिए यह पर्याप्त हो सकता है। कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे- एंटीबायोटिक दवाओं के बाद या कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं में डॉक्टर प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस बीमारी के लिए कौन-सा स्ट्रेन उपयोगी माना गया है। सभी प्रोबायोटिक सप्लीमेंट एक जैसे नहीं होते और सभी का प्रभाव भी समान नहीं होता है।

क्या प्रोबायोटिक्स के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं?

अधिकतर स्वस्थ लोगों के लिए प्रोबायोटिक्स सुरक्षित माने जाते हैं। हालांकि शुरुआत में कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या हल्की असहजता महसूस हो सकती है, जो अक्सर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन जिन लोगों की इम्यूनिटी बहुत कमजोर है, गंभीर बीमारी है, ICU में भर्ती हैं या ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के प्रोबायोटिक सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए। ऐसे मामलों में दुर्लभ लेकिन गंभीर संक्रमण का जोखिम हो सकता है।

क्या प्रोबायोटिक्स हर बीमारी का इलाज हैं?

नहीं, यह एक आम गलतफहमी है। प्रोबायोटिक्स कुछ स्थितियों में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी भी बीमारी का चमत्कारी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। वैज्ञानिक संस्थाओं का भी कहना है कि अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अलग-अलग प्रोबायोटिक स्ट्रेन पर शोध चल रहा है और सभी दावों के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

स्वस्थ गट के लिए सिर्फ प्रोबायोटिक्स काफी नहीं

अगर आप लंबे समय तक अपनी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो सिर्फ प्रोबायोटिक्स पर निर्भर रहने के बजाय पूरी जीवनशैली पर ध्यान दें। इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

Probiotics

  • रोज पर्याप्त फाइबर लें।
  • मौसमी फल और सब्जियां खाएं।
  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • प्रोसेस्ड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
  • बिना जरूरत एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें, इत्यादि।

Disclaimer:  प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन उनका प्रभाव व्यक्ति, स्वास्थ्य स्थिति और इस्तेमाल किए गए स्ट्रेन पर निर्भर करता है। संतुलित आहार, प्रीबायोटिक्स से भरपूर फाइबर, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के साथ प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। यदि आप किसी बीमारी के लिए प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने की सोच रहे हैं, तो पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहेगा।