
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Ganesh N Mhetras
plant protein vs animal protein (AI generated image)
हम जब भी हेल्दी डाइट की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक अच्छी प्रोटीन बेस्ड डाइट आती है। आज के समय में हर कोई जान गया है कि प्रोटीन बहुत जरूरी हो गया है और अगर आपकी डाइट में प्रोटीन नहीं है तो हेल्थ को उसके कई नुकसान हो सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन लिमिट में सेवन करना बहुत जरूरी है क्योंकि डाइट में जरूरत से ज्यादा प्रोटीन आपकी किडनी को नुकसान पहंचा सकता है और खासतौर पर जिन लोगों को पहले से ही किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है जैसे कि क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) आदि। आज दुनिया भर में क्रोनिक किडनी डिजीज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस बीमारी में किडनी धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता खोने लगती है, जिससे शरीर से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ सही खानपान भी किडनी की सेहत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हम अपनी डाइट में आमतौर पर प्रोटीन दो अलग-अलग तरह का प्रोटीन लेते हैं एनिमल बेस्ड प्रोटीन और प्लांट बेस्ड प्रोटीन। अब सोचने वाली बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति की किडनी कमजोर हो या उसे किडनी से जुड़ी किसी प्रकार की समस्या हो तो उसे कौन सा प्रोटीन लेना चाहिए? डॉ. गणेश म्हेत्रे , कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल, खराड़ी, पुणे से कुछ चीजों के बारे में खास जानकारी लेंगे।
एनिमल सॉर्स वाले प्रोटीन जैसे चिकन, मछली, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट्स आदि से मिलने वाला प्रोटीन बेहद हाई क्वालिटी का प्रोटीन होता है। लेकिन डॉ. गणेश के अनुसार यह क्रोनिक किडनी डिजीज के रोगियों के लिए अच्छा विकल्प नहीं होता है। हालांकि, नुकसान का रिस्क तब बढ़ता है, जब इसे लिमिट से ज्यादा मात्रा में लिया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो क्रोनिक किडनी रोगियों के लिए इनका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
लिमिट से ज्यादा प्रोटीन लेने पर किडनी को ज्यादा फिल्टर का काम करना पड़ता है और इस कारण कई बार किडनी प्रभावित हो जाती है जिसे "हाइपरफिल्ट्रेशन इंजरी" कहा जाता है।
एनिमल प्रोटीन में फास्फोरस की मात्रा भी अपेक्षाकृत अधिक होती है और जब किडनी फास्फोरस को ठीक तरह से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह रक्त में जमा होने लगता है। इससे हड्डियों की कमजोरी और अन्य जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। एनिमल प्रोटीन शरीर में एसिड लोड बढ़ा सकता है। इससे मेटाबॉलिक एसिडोसिस की स्थिति पैदा हो सकती है, जो किडनी की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावित कर सकती है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिन लोगों को क्रोनिक किडनी डिजीज है या फिर किडनी से जुड़ी अन्य कोई समस्या है, तो उनके लिए एनिमल प्रोटीन की तुलना में प्लांट बेस्ड प्रोटीन अच्छा विकल्प हो सकता है। प्लांट प्रोटीन के सोर्स जैसे दालें, बीन्स, सोया उत्पाद, चना, राजमा, मटर और अन्य पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसपर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि प्लांट प्रोटीन किडनी पर अपेक्षाकृत कम दबाव डालता है, जिससे हाइपरफिल्ट्रेशन इंजरी का जोखिम कम हो सकता है और अगर पहले से किडनी में कोई दिक्कत है तो उसके और ज्यादा बढ़ने का डर भी कम हो जाता है।
क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए एनिमल प्रोटीन की बजाय प्लांट प्रोटीन अच्छा विकल्प रहा है, लेकिन फिर भी इसे एक किडनी विशेषज्ञ और डाइट एक्सपर्ट की सलाह के बिना अपनी डाइट में शामिल करना उचित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई पौधों आधारित खाद्य पदार्थों में पोटेशियम की मात्रा अधिक हो सकती है और शरीर में पोटेशियम की ज्यादा मात्रा भी किडनी के लिए अच्छी नहीं होती है। किडनी के मरीजों के लिए एनिमल बेस्ड प्रोटीन की तुलना में प्लांट बेस्ड प्रोटीन ज्यादा अच्छा विकल्प है, लेकिन एक्सपर्ट्स की सलाह के साथ ही इसका सेवन किया जाना चाहिए।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल किडनी के मरीजों के लिए कौन से प्रोटीन फूड्स अच्छे हैं आदि के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।