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Written By: Yogita Yadav | Published : August 31, 2019 4:40 PM IST
Amid coronavirus chaos, many parents are facing the challenge of explaining the situation to their kids© Shutterstock
1 से 7 सितंबर तक प्रति वर्ष राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (Malnutrition in kids) मनाया जाता है। इसमें पोषण संबंधी जरूरतों (Malnutrition in kids) पर बात की जाती है। लाइफस्टाइल में आए बदलाव के कारण भोजन करने के बावजूद बच्चों में पोषण की कमी नजर आ रही है। सेहतमंद दिखने वाले बच्चों में भी अब पोषण की कमी (Malnutrition in kids) होने लगी है। जिसके कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानें पोषण की कमी के कारण सामान्यत: बच्चों में क्या परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
बच्चों में पोषण की कमी (Malnutrition in kids) कई तरह इफैक्ट करती है। लगातार थकान, उदासी, चिड़चिड़ापन भी पूरा पोषण न मिलने के कारण ही हैं। यहां पोषण से अर्थ केवल भोजन से ही नहीं है। बल्कि शरीर के पोषण संबंधी आवश्यकताओं से है। जिसमें बच्चा पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक विकास के लिए तैयार होता है।
पोषण में कमी (Malnutrition in kids) का सबसे सामान्य लक्षण लंबाई में कमी रह जाना है। हालांकि अभी तक यह माना जाता था कि लंबाई आनुवांशिक होती है। यानी अगर मां-बाप लंबे होंगे तो ही बच्चे भी लंबे हो पाएंगे। पर अब वैज्ञानिक मान रहे हैं कि बच्चे की लंबाई में पोषण का अहम योगदान होता है।
यह बीमारी विटामिन बी-1 की कमी (Malnutrition in kids) से होती है। यह बच्चे की मांसपेशियों, दिल और पाचन शक्ति आदि को प्रभावित करती है। बेरीबेरी के 2 प्रकार होते हैं। पहला आर्द्र (वेट) बेरीबेरी और दूसरा शुष्क (ड्राई) बेरीबेरी। आर्द्र बेरीबेरी हार्ट को प्रभावित करता है, जबकि शुष्क बेरीबेरी नर्व को कमजोर करता है।
पोषण की कमी (Malnutrition in kids) से कई बच्चों में घेंघा की समस्या भी सामने आती है। घेंघा यानि गोइटर रोग की स्थिति में गले में असामान्य सूजन हो जाती है। यह स्थिति थायरॉइड ग्रंथि से जुड़ी होती है। जब थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, तो उसे घेंघा के नाम से जानते हैं। सूजन की वजह से सांस लेने में समस्या होती है। हालांकि यह समस्या बच्चों को बहुत कम आती है।
यह रोग खाने में विटामिन-सी की कमी (Malnutrition in kids) से होता है। विटामिन-सी की कमी होने से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और बच्चा स्कर्वी का शिकार हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा गर्भ में पल रहा शिशु प्रभावित होता है। डॉक्टरों के अनुसार महिला में विटामिन-सी की कमी रहने से पेट में पल रहे शिशु का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है। इसके अलावा कई बार इस बीमारी की वजह से छोटे बच्चों के शरीर में सूजन आ जाती है। वैसे तो स्कर्वी की शिकायत भी बहुत कम देखने को मिलती है, लेकिन जिन बच्चों की डाइट में फल और सब्जियों की मात्रा कम होती है, उनमें इस बीमारी के होने की आशंका बनी रहती है।
इस बीमारी में (Malnutrition in kids) बच्चों की हड्डियां मुलायम हो जाती हैं। कई बार हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि साधारण दबाव से टूट भी जाती हैं। यह बीमारी विटामिन-डी की कमी से होती है। दरअसल विटामिन-डी हड्डियों में कैल्शियम और फास्फोरस को अवशोषित करता है। ऐसे में विटामिन-डी की कमी होने पर शरीर में विटामिन-सी और फास्फोरस की कमी हो जाती है। 3 से 36 महीने तक के बच्चों में इस बीमारी के होने की आशंका ज्यादा रहती है।
इस बीमारी की वजह शरीर में विटामिन बी3 की कमी है। यह बीमारी पाचन क्रिया, त्वचा और नर्व को प्रभावित करती है। हरी सब्जियां न खाने वाले बच्चों को इस बीमारी के होने का ज्यादा डर रहता है। इससे उनमें सामान्य बच्चों की तुलना में त्वचा में एक अलग किस्म की डलनैस दिखने लगती है।
पूरा पोषण (Malnutrition in kids) न मिलने वाले बच्चों में वजन दो तरह से इफैक्ट करता है। या तो वे बहुत ज्यादा दुबले-पतले होते हैं या कभी-कभी उनक वजन इतना ज्यादा होता है कि वे अपने डेली रूटीन के काम भी ठीक से नहीं कर पाते। दोनों ही लक्षण पोषण की कमी के हैं।
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