सिर्फ लाभ ही नहीं, नुकसान भी हैं तांबे के बर्तन के, बरतें सावधानी

पानी पीने के लिए तांबे के बर्तन (Copper Vessel) का उपयोग भारत में सबसे ज्यादा होता है. आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में पानी पीने के नियम भी बताए गये हैं. अगर आप भी तांबे के बर्तन में पानी पीने फायदे जानते हैं, तो तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान के बारे में भी जानकारी रखनी चाहिए.

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Written By: Yogita Yadav | Updated : December 26, 2019 10:46 AM IST

भारत में तांबे के बर्तन का विशेष महत्व है. तांबा धातु अपने आप में एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक है. सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से स्वास्थ्य को अनेक लाभ होते हैं. कई बार गलत तरीके और समय पर तांबे के बर्तन में पानी पीने से नुकसान भी होने लगता है. ऐसे में तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे और नुकसान दोनों की जानकारी रखनी चाहिए. तांबे के बर्तन की सफाई का भी विशेष ध्यान रखना होता है. क्योंकि तांबे के बर्तन में कॉपर की परत जमने का खतरा रहता है. वैज्ञानिक शोधों में भी तांबे के स्वास्थ्य गुणों को प्रमाणित किया जा चुका है. एक अध्ययन के अनुसार ई-कोलाई के 99.9 प्रतिशत जीवाणु तांबे की सतह पर 2 घंटे में ही समाप्त हो सकते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर वात, पित्त और कफ तीनों को ही संतुलित करता है. लेकिन इसके लिए यह भी आवश्यक कि पानी कम से कम इसमें 8 घंटे रखा होना चाहिए. तांबे के बरतन में रखे पानी की एक और खास बात यह है कि यह पानी कभी भी बासी नहीं होता और लंबे समय के लिए ताजा रहता है. इन सब फायदों के अलावा तांबे के बर्तन में पानी पीना कब नुकसानदेह हो सकता है इसकी भी जानकारी जरूरी होती है.

बीमारियां ठीक करने में मददगार 

पानी के साथ तांबा रासायनिक प्रतिक्रिया करता है और इस तरह इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लामेंटरी और कैंसररोधी प्रॉपर्टीज उत्पन्न होते हैं. यही कारण है कि तांबे के बरतन में रखा पानी पीना कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करता है। आयुर्वेद के अनुसार इन 4 धातुओं के बर्तन में भोजन करने से होते हैं अनेक फायदे जरूर जानें.

मर जाते हैं विषाणु

एक अध्ययन के अनुसार तांबे के पात्र में जल रखने से इसकी अशुद्धियों को भी कम किया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि 16 घंटे तक इस धातु के पात्र में पानी रखने से उसमें मौजूद ज्यादातर जीवाणु मर गए। उस पानी में विशेष रूप से मौजूद ‘पेचिश के विषाणु’ और ‘ई-कोलाई’ के अमीबा तो पूरी तरह समाप्त हो गए।

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वजन कम करना है, तो हर रोज पिएं तांबे के बर्तन में पानी.

घाव भरता है तांबा 

अपने एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लामेंटरी गुणों के कारण ताम्रजल शरीर को अपने आंतरिक और बाह्य घावों को जल्दी भरने में मदद मिलती है। यह थाइरॉयड ग्रंथि के स्राव को भी संतुलित करता है और अर्थराइटिस के दर्द को ठीक करने में लाभकारी है। शरीर में लौह तत्वों के अवशोषण में सहायक होकर खून की कमी को दूर करता है और कोलेस्ट्रोल कम करता है।

तांबे के बर्तन के उपयोग में सावधानियां 

लोग अक्सर इस पानी के इस्तेमाल में एक असावधानी बरतते हैं। ज्यादातर घरों में इसके स्वास्थ्य लाभ देखते हुए तांबे के जग या ग्लास में पानी रखकर उसे पिया जाता है, लेकिन ध्यान यह रखें कि इस बरतन को कभी भी जमीन पर न रखें वरना आपको इसका कोई भी लाभ नहीं मिलेगा।

रखें पूरी सफाई

इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि इसके अंदरूनी तले को अच्छी प्रकार साफ करें, वरना उस पर कॉपर ऑक्साइड की परत (हरे रंग की) जमने लगती है और तब भी आपको इस पानी के पूरे लाभ नहीं मिल पाते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कॉपर ऑक्साइड की परत के कारण तांबे के साथ पानी का सीधा संपर्क नहीं हो पाता और इस कारण रासायनिक क्रिया नहीं हो पाती।

तांबे के बर्तन में पानी पीने के नुकसान

कुछ लोगों में तांबे के बर्तन के प्रति सहनशीलता नहीं होती है. कुछ लोगों को सर्दियों के मौसम में तांबे के बर्तन में पानी पीने से नुकसान हो सकता है. ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि तांबे के बर्तन की ठीक से सफाई न करने की वजह से ही परेशानी होती है.

कॉपर या तांबे के बर्तन की ठीक से सफाई न करने से कॉपर ऑक्साइड की परत जमने लगती है. ऐसी स्थिति में तांबे के बर्तन में पानी पीना नुकसान देने वाला होता है. अगर आप नियमति तौर पर तांबे के बर्तन में पानी पीते हैं, तो आपको उसकी सफाई का विशेष ध्यान रखना होता है.

सेहत के लिए इस तरह करें तांबे का उपयोग, बचेंगे रहेंगे बीमारियों से.

Copper vessel benefits : आपकी ब्‍यूटी का भी ध्‍यान रखते हैं तांबे के बर्तन.

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