नवरात्र 2019 : गर्मियों में रख रहे हैं उपवास, तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान
नवरात्र 2019 : गर्मियों में रख रहे हैं उपवास, तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान
उपवास की परिकल्पना असल में बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए की गई है पर इस दौरान फलाहार के नाम पर हम ऐसा भोजन कर लेते हैं जो बॉडी को डिटॉक्स करने की बजाए और कई समस्याओं का घर बना देता है। इसलिए इस बार चैत्र नवरात्र में उपवास के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान।
Written By: Yogita Yadav | Published : April 3, 2019 2:28 PM IST
चैत्र नवरात्र इस बार 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। बहुत से लोग इस दौरान पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं। आस्था से अलग अगर इसे स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो उपवास बॉडी को डिटॉक्स करने का बेहतर तरीका है। पर कई बार उपवास के दौरान हम ऐसी गलतियां कर बैठते हैं कि उसके लाभ मिलने की बजाए और नुकसान ही उठाने पड़ते हैं। अगर आप उपवास की तैयारी कर रहे हैं तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
उपवास का अर्थ पूरे दिन भूखे रहना नहीं है, बल्कि अपनी डायट में कुछ खास चीजों को शामिल करना और कुछ का कुछ समय के लिए परहेज करना है। उपवास को इसी तरह लें, तो स्वास्थ्य को लाभ होगा।
आयुर्वेद में यह साफ कहा गया है कि आहार के साथ-साथ उसके खाने का तरीका और समय भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उपवास में भी आहार के लिए कुछ नियम निर्धारित किए जाते हैं। स्वास्थ्य के लिए इन नियमों के साथ फलाहार करें।
आहार विशेषज्ञों के अनुसार उपवास के दौरान अनाज की कमी की पूर्ति करते हुए संतुलित भोजन लेना बहुत जरूरी है। अधिक तला-भुना, मीठा या बिना नमक का खाना लेने से जहां ब्लडप्रेशर में कमी, शुगर या वजन बढ़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
उपवास के दौरान कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो जाती है। इसकी वजह अधिक गढिष्ठ भोजन करना और पानी की कमी है। आहार में बेशक कमी करें, परंतु शरीर में पानी की कमी न होने दें, विशेषकर गर्मियों में।
गर्मियों में सुगमता से मिलने वाले फल जैसे तरबूज, खरबूजा, ककड़ी आदि को अपने आहार में शामिल करें। ये फल एनर्जी और पानी की कमी नहीं होने देते।
फलाहारी सामग्री से इस तरह का भोजन तैयार करना चाहिए जिससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषण मिल सके। छाछ और दही को अलग-अलग तरीकों से अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
नींबू पानी भी शरीर को एनर्जी देने का बेहतर तरीका है। अगर आप कामकाजी हैं और व्रत रख रहे हैं तो अपने साथ नींबू पानी रखें। इससे आपके शरीर में एनर्जी और पानी की कमी नहीं होगी।
मौसमी फल यानी वे फल जो आसानी से मिल जाते हैं उन्हें आहार में शामिल करें। इसके अलावा पपीते, स्ट्राबेरी, चीकू का शेक, पाइनएपल, मौसम्बी व संतरे का जूस आदि भी बीच-बीच में लिया जा सकता है।
वहीं उपवास के दौरान अगर एक बार फलाहार ग्रहण कर रहे हैं तो सिर्फ साबूदाने की खिच़ड़ी या आलू का हलवे जैसे किसी एक गरिष्ठ व्यंजन पर निर्भर रहने के बजाए कुट्टु, सिंघाड़े या राजगीर के आटे में उबला आलू मैश कर रोटी का आटा तैयार करें। इससे रोटी या पराठा बनाकर दही या लौकी के रायते के साथ खाने से पेट भी भरेगा और वजन बढ़ने की समस्या भी नहीं होगी। साबूदाना खिचड़ी में अगर आलू के बजाए लौकी का उपयोग किया जाए तो वह गरिष्ठ नहीं होगी।
सुबह उठने के बाद ज्यादा देर तक भूखे रहने से एसीडिटी और लो ब्लडप्रेशर आदि की परेशानी हो सकती है। व्रत के दौरान सुबह चाय पीने के बाद छाछ, दही, अधपकी सब्जियों का सलाद, फल आदि खाने से शरीर को एनर्जी मिलने लगती है।
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