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राष्‍ट्रीय पोषण सप्‍ताह 2018: शिशुओं की सेहत के लिए ट्रेडिशनल फूड है बेस्‍ट

शुरुआती अवधि का यह समय बच्‍चों में रखता है सही पोषण की नींव।

राष्‍ट्रीय पोषण सप्‍ताह के दौरान यह देखा गया कि छोटे बच्‍चों में पोषण की बहुत कमी है। इस दिशा में प्रयास कर रहे लोगों का मानना है कि शिशुओं का शुरूआती समय पोषण के लिहाज से बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। इनमें भी छह माह के बाद शिशुओं के पोषण पर बहुत ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत होती है। शिशुओं में पोषण की कमी न हो इसके लिए रखें इन बातों का ध्‍यान -

छह माह सिर्फ स्‍तनपान

6 माह तक के शिशु को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि तक शिशु का पाचन तंत्र पूर्ण रूप से विकसित नहीं होता है। शिशु की अवस्था किसी भी प्रकार के ठोस आहार को लेने की नहीं होती है। इसीलिए 6 माह तक शिशु सिर्फ मां के दूध पर ही आश्रित होता है।

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छह माह के बाद शुरू करें ठोस आहार

शिशु को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि छह माह के बाद उसे ठोस आहार देना शुरू कर दें। 6 माह के शिशु में ठोस आहार शुरू करते वक्त आप उसे दाल का पानी, चावल का पानी, खीर और हलवा दे सकती हैं। आप अपने शिशु को फल और सब्जिय को भी उबाल के दे सकती। इन्हें उबालने के बाद आप इसे पीस कर चमच की सहायता से अपने शिशु को खिलाएं।

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परंपरागत फूड है बेस्‍ट

शिशुओं के पोषण के लिए परंपरागत फूड ही बेस्‍ट है। इसमें बच्‍चों की आवश्‍यकता के अनुसार ही पोषक तत्‍व होते हैं। 9 महीने तक के शिशु को आप आहार में ऐसे भोजन दें जो मुलायम हो और जिसे आप का शिशु आसानी से निगल सके। इस उम्र में बहुत से बच्चों के पूरे दांत नहीं आ पाते। लेकिन उनके मसूड़े इतने मजबूत होते हैं कि वे चावल और उबले आलू खा सकें। इससे शिशु को 1 साल तक की अवस्था में आने पर ठोस आहार खाने की आदत पड़ जाएगी।

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शिशु को दिए जाने वाले कुछ प्रमुख खाद्य पदार्थ

इस उम्र में शिशुओं को बिना छिलके के सेब, नाशपाती, खजूर, तरबूजा,  आम आदि फल दिए जा सकते हैं। सब्जी के रूप में गाजर,  गोभी, लौकी,  पालक,  कद्दू आदि भी उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहतर है। उबले हुए शकरकंद,  बेसन का चिल्ला, दाल का पानी, दलिया, सूप, दाल-चावल, दही, रोटी बच्‍चों के लिए उत्‍तम है।

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रखें इन बातों का ध्‍यान

1 साल तक की अवस्था में शिशु को 1 दिन में 400 मिली ग्राम से अधिक दूध न दें अधिक दूध पिलाने से शिशु को भूख कम लगेगी जिससे वह ठोस आहार को खाने में रुचि नहीं दिखाएगा। जिससे शिशु को मिलने वाले अन्य पोषक तत्व जैसे आयरन विटामिन्‍स आदि नहीं मिल पाएंगे।

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