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Myths about Rice: चावल एक ऐसा खाद्य है जिसके बिना भारत में लोगों को खाना अधूरा लगता है। जब तक लोगों को खाने में दाल या कढ़ी के साथ चावल ना मिले उनका पेट नहीं भरता। भारत के तटवर्तीय इलाकों में जहां चावल मुख्य भोजन है वहीं, मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में भी सालभर चावल का सेवन अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। लेकिन, जहां चावल खाने से सेहत को कई प्रकार के फायदे होते हैं। वहीं, इससे शरीर को नुकसान पहुंचने की भी बातें कही जाती हैं। चावल से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथकों के बारे में पढ़ें यहां, जिनकी वजह से लोग चावल के सेवन से परहेज करते हैं। (Myths about Rice)
यह मिथक पूरी तरह से ग़लत है। चावल में फैट्स की मात्रा कम ही होती है। साथ ही चावल के दानों में मौजूद नैचुरल शुगर का स्तर भी लो होता है। इसीलिए, जब आप डायबिटीज में चावल का सेवन करते हैं जो इंसुलिन का निर्माण भी सही तरीके से होता है।
चावल को वेट लॉस का दुश्मन माना जाता है। इसीलिए, लोग वेट अपनी लॉस डायट में चावल को पूरी तरह निकाल देते हैं। लेकिन, यह बात सही नहीं है। पॉप्युलर मिथ के उलट चावल खाने से वजन कम होने में मदद होती है। अन्य किसी भी होल ग्रेन की तरह चावलों से भी फाइबर और प्रोटीन प्राप्त होता है, जो वेट लॉस की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं। (Myths about Rice)
हालांकि, एक्सपर्ट्स के अऩुसार, चावल खाने से वज़न कितना कम होता है यह आपकी मेटाबॉलिक रेट पर निर्भर करता है। कई स्टडीज़ में यह कहा गया है कि, बहुत अधिक चावल खाने से मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसीलिए, चावलों का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए। इसी तरह एक दूसरी स्टडी में यह कहा गया है कि, चावल का सेवन करने से वज़न नहीं बढ़ता। बशर्तें इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए। इस बात को साबित करने के लिए उन देशों का उदाहरण दिया गया जहां, लोग चावल अधिक खाते हैं।