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Written By: Yogita Yadav | Published : August 20, 2019 4:27 PM IST
हमारी रसाई में एक ऐसा खास मसाला है जिसका सेवन किसी भी चीज की पौष्टिकता को बढ़ा देता है और आप उसका किसी भी मौसम में सेवन कर सकते हैं। © Shutterstock
मॉनसून (Turmeric in monsoon) में अकसर लोग दूध पीना बंद कर देते हैं। उनका मानना है कि इस मौसम में हाजमा कमजोर हो जात है, जिससे दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट हजम नहीं हो पाते। पर क्या आप जानते हैं कि हमारी रसाई में एक ऐसा खास मसाला (Turmeric in monsoon) है जिसका सेवन किसी भी चीज की पौष्टिकता को बढ़ा देता है और आप उसका किसी भी मौसम में सेवन कर सकते हैं।
हल्दी भले ही देखने में साधारण लगे। पर यह खास औषधीय गुणों से भरपूर है। चिकित्सा जगत में यह एकमात्र मसाला है जिसके पेटेंट को लेकर कई देशों के बीच खींचतान रही है। हालांकि सारी दुनिया जानती है कि जिस तरह भारतीय व्यंजनों में हल्दी का इस्तेमाल होता है, उस तरह कहीं और नहीं हो सकता। मॉनसून में होने वाली बीमारियों से भी हल्दी बचाव करती है। शरीर के विषैले तत्वों को निकालने और रक्त शुद्धि के लिए यह एक बढि़या औषधि है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि बरसात के मौसम में हल्दी का सेवन जरूर करना चाहिए।
हल्दी को आयुर्वेद में औषधि माना गया है। इसे अब भी सबसे बेहतर घरेलू औषधि माना जाता है। आपने अपनी दादी-नानी को भी कई बीमारियों का इलाज हल्दी से करते देखा होगा। छोटे-मोटे जख्म हो जाने पर उन हल्दी बांध दी जाती है। सब्जी की पौष्टिकता, रंग और स्वाद हल्दी डालने से बढ़ जाता है। वहीं अगर आपको दूध हजम न होता हो तो दूध में हल्दी डालकर पी जा सकती है। यह नेचुरल पेन किलर भी है।
अन्य देशों की तुलना में भारत में अल्जाइमर की मरीजों की संख्या बहुत कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह है भारतीय खानपान में हल्दी का शामिल होना। हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन’ में ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं। इसे एक संभावित कारण बताया गया है कि भारत में, जहां करक्यूमिन आहार में शामिल होता है, बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। हल्दी का हर रोज सेवन करने वालों की याददाश्त भी अन्य लोगों की तुलना में बेहतर होती है।
लॉस ऐंजिलिस की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोध के मुताबिक करक्यूमिन अपना असर कैसे दिखाता है, यह ठीक-ठीक पता नहीं है, लेकिन दिमागी उत्तेजना को कम करने की इसकी काबिलियत के कारण ऐसा हो सकता है, जिसे अल्जाइमर रोग और गहरे अवसाद से जोड़ा गया है।
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