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मोरिंगा (Moringa benefits) एक पौधा है, जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के क्षेत्रों में मुख्य रूप से पाया जाता है। यह उष्ण कटिबंध (Tropics) में भी उगाया जाता है। मोरिंगा को हिंदी में सहजन, सुजना, मुनगा आदि नामों और अंग्रेजी में Moringa (मोरिंगा) या Drumstick tree (ड्रमस्टिक) भी कहते हैं। औषधि या दवाएं बनाने के लिए इसके पेड़ के पत्ते, छाल, फूल, फल, बीज और जड़ सभी चीजों का उपयोग किया जाता है।
मोरिंगा का उपयोग अस्थमा (asthma), मधुमेह (diabetes), मोटापा (Obesity), रजोनिवृत्ति के लक्षण (symptoms of menopause) और कई अन्य बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। मोरिंगा के बीजों के तेल का उपयोग खाद्य पदार्थों, इत्र और बालों की देखभाल करने वाले उत्पादों में और मशीन लुब्रिकेंट के रूप में भी किया जाता है।
पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सहजन सब्जी का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना गया है। इसकी पत्तियों से तैयार पाउडर भी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। मोरिंगा या सजहन के पेड़ की सूखी हुई पत्तियों (Moringa leaves) में विटामिंस और मिनरल्स काफी मात्रा में होता है।
सहजन ही नहीं इसकी पत्तियों से तैयार पाउडर के भी होते हैं कई लाभ
मोरिंगा में प्रोटीन्स, विटामिंस और मिनरल्स भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से भी बचाता है।
शुरुआती शोध से पता चलता है कि 3 सप्ताह तक रोजाना 3 ग्राम मोरिंगा लेने से अस्थमा के लक्षणों की गंभीरता कम हो जाती है। हल्के से मध्यम अस्थमा वाले वयस्कों में फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि 6 महीने तक प्रत्येक भोजन के साथ मोरिंगा लीफ पाउडर लेने से बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में वृद्धि हो सकती है, लेकिन इम्यून फंक्शन में सुधार नहीं होता है।
शोध से पता चलता है कि 3 महीने के लिए अपने खानपान में ताजे मोरिंगा के पत्तों (Moringa leaves) को शामिल करने से रजोनिवृत्ति के लक्षणों (symptoms of menopause) जैसे कि हॉट फ्लैशेज, अनिद्रा आदि की समस्या में काफी हद तक सुधार होता है