डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है कमल ककड़ी, तेजी से घटाती है ब्लड शुगर लेवल
ऐसा ही देसी सूपरफूड है कमल ककड़ी, जिसे अंग्रेजी में लोटस रूट्स कहते हैं। हिंदी में कामकड़ी के रूप में पहचानी जाने वाली कमल ककड़ी एक ऐसा सुपरफूड है जिसे प्राचीन काल से ही हमारी भारतीय रसोई में एक महत्वपूर्ण स्थान मिला है। कमल ककड़ी पैंटोथेनिक एसिड, फॉलेट, विटामिन्स, मिनरल्स, मैग्नीशियम, आयरन और विटामिन सी सहित आदि पोषक तत्वों का सीधा स्त्रोत है।
Written by Rashmi Upadhyay|Updated : October 27, 2020 1:01 PM IST
जब भी हेल्दी खानपान या डाइट को फॉलो करने की बात आती है तो लोगों के दिमाग में देसी नहीं बल्कि विदेशी चीजें पहले आती हैं। जबकि जो पोषक तत्व हमें देसी चीजों से मिल सकते हैं वह शायद बाहर की चीजों से न मिले। ऐसा ही देसी सूपरफूड है कमल ककड़ी, जिसे अंग्रेजी में लोटस रूट्स कहते हैं। हिंदी में कामकड़ी के रूप में पहचानी जाने वाली कमल ककड़ी एक ऐसा सुपरफूड है जिसे प्राचीन काल से ही हमारी भारतीय रसोई में एक महत्वपूर्ण स्थान मिला है। कमल ककड़ी पैंटोथेनिक एसिड, फॉलेट, विटामिन्स, मिनरल्स, मैग्नीशियम, आयरन और विटामिन सी सहित आदि पोषक तत्वों का सीधा स्त्रोत है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कमल ककड़ी स्वास्थ्य के लिए किस तरह से फायदेमंद है।
डायबिटीज और कमल ककड़ी
यदि आप मधुमेह रोगी हैं और आपका ब्लड शुगर लेवल काफी अनियंत्रित है तो आपके लिए कमल ककड़ी का सेवन बहुत फायदेमंद हो सकता है। अपने दैनिक आहार में कमल ककड़ी को शामिल करने से ब्लड शुगर लेवल को सामान्य किया जा सकता है। कई अध्ययनों और क्लिनिकल टेस्ट में यह साफ हुआ है कि कमल ककड़ी में एंटीऑक्सिडेंट, मिनरल्स और विटामिन उच्च मात्रा में पाया जाता है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखता है। कमल ककड़ी में मौजूद राइजोम्स ग्लूकोज लेवल को मेनटेन करने में मदद करता है। इसके अलावा कमल ककड़ी फाइबर का भी जबरदस्त स्त्रोत है। कमल ककड़ी में मौजूद मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स इंसुलिन रेजिस्टेंस को भी सही करने में मदद करते हैं।
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कमल ककड़ी खाने के अन्य लाभ
लोटस स्टेम में मौजूद एक कसैला पदार्थ टैनिन होता है, जो लीवर की रक्षा करता है। एक अध्ययन के अनुसार, कमल ककड़ी में मौजूद कंडेनस टैनिन लिवर से जुड़ी हिपेटोमिगेली और अल्कोहल फैटी लीवर जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
सूजन शरीर में कई तरीकों से उभरता है, जैसे कि मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द या रैशेज। इन सभी तकलीफों की जड़ों तक पहुंचने के लिए कमल ककड़ी को अपने भोजन में शामिल करें।
कमल ककड़ी में एंटीऑक्सीडेंट भी काफी मात्रा में होता है, जो कैंसर और फ्री-रैडिकल्स से होने वाले नुकसानों से हमें बचाता है। डायट में इसे किसी ना किसी रूप में जरूर शामिल करें। कमल की जड़ें खाने से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
बुखार होने पर पैरासिटामोल की बजाय कमल ककड़ी खाएं। इसमें बुखार को कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं, जो बुखार की दवा के रूप में काम करते हैं। इससे शरीर को ठंडक मिलती है, इसलिए बुखार में जब शरीर का तापमान अधिक हो, तो इसका सूप बनाकर पीड़ित को पिलाएं।
कमल ककड़ी में इथेनॉल का अर्क मौजूद होता है, जो ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सकता है। यह ग्लूकोज टॉलरेंस में सुधार करता है।
यदि आपको दस्त की समस्या हो रही है, तो कमल की जड़ें उबालकर उस पानी को पिएं। एक स्टडी में इस बात की पुष्टि हुई है कि लोटस रूट में एंटीडायरियल गुण मौजूद होते हैं।
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