क्या खाना पकाने वाले के अच्छे या ख़राब मूड का पड़ता है भोजन के स्वाद पर असर?

दरअसल, एक जापानी लेखक और शोधकर्ता मासारू इमोतो के मुताबिक, मानव शरीर से भोजन में प्रवाहित होने वाली यह ऊर्जा भोजन खाने वाले व्यक्ति तक भी पहुंचती हैं। इसी तरह भोजन का स्वाद, रंगत और स्वाद भी खाना पकाने वाले व्यक्ति के मूड के आधार पर प्रभावित होती है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 22, 2020 8:57 PM IST

Link Between Emotions and Food:  क्या आपने ध्यान दिया है कि जिस दिन आप बहुत खुश होकर खाना बनाते हैं, उस दिन खाने का स्वाद बहुत अधिक बढ़ जाता है। लेकिन, जिस दिन आपका मूड ख़राब होता है , उस दिन भोजन में स्वाद भी नहीं आता अब भले ही आप इस बात पर यकिन करें या ना करें। लेकिन, आपकी भावनाओं का असर आपके  भोजन पर भी पड़ता है। (Link Between Emotions and Food in hindi)

दरअसल, एक जापानी लेखक और शोधकर्ता मासारू इमोतो (Masaru Emoto) ने इसकी पुष्टि भी की है। उन्होंने, पानी के ऊपर विभिन्न मानवीय भावनाओं और विचारों के प्रभाव पर रिसर्च किया है।  इमोतो की खोज से यह निष्कर्ष निकलते हैं कि मनुष्य की ऊर्जा और मानसिक अवस्था पानी के मॉलेक्यूल्स स्ट्रक्चर (molecular structure) को प्रभावित करते हैं।

क्या सचमुच हमारे मूड के हिसाब से आता है खाने का स्वाद?

इमोतो के रिसर्च और एक्सपेरिमेंट्स से पता चलता है कि सकारात्मक विचार (Positive thoughts), शब्द और प्रार्थनाओं से पानी की संरचना पर सकारात्मक असर पड़ता है। इसी तरह पानी में घुली गंदगी भी साफ हो जाती है। जबकि, नकारात्मक सोच और उदासी, निराशा जैसी भावनाएं भी पानी की संरचना को प्रभावित करती हैं। लेकिन, नकारात्मक तरीके से । जब, आप खाना बनाते हैं तो यही सिद्धांत वहां भी लागू होता है।

दरअसल, खाना बनाने वाले व्यक्ति में एक अदृष्य ऊर्जा होती है, जिसे भोजन अवशोषित कर लेता है। मानव शरीर से भोजन में प्रवाहित होने वाली यह ऊर्जा भोजन खाने वाले व्यक्ति तक भी पहुंचती हैं। इसी तरह भोजन का स्वाद, रंगत और स्वाद भी खाना पकाने वाले व्यक्ति के मूड के आधार पर प्रभावित होती है।

लॉकडाउन में ना रहें उदास, बिगड़ जाएगा आपके खाने का स्वाद

जब कोई व्यक्ति खुशी-खुशी खाना पकाता है तो भोजन का स्वाद भी बढ़ जाता है। लेकिन, दूसरी तरफ जब आप दुखी मन से या उदास हो कर खाना पकाते हैं तो, बहुत कोशिशें करने के बावजूद भी खाना बेस्वाद बन जाता है।

इन दिनों जैसा कि लॉकडाउन की वजह से हम सभी घरों में बंद हैं। ऐसे में जिन लोगों के घर खाना पकाने के लिए कोई कूक या रसोइयां आता था, वह भी नहीं आ रहे। तो वहीं, आमतौर पर खुद का खाना पकाने वाले लोगों को भी कोविड-इंफेक्शन का खौफ और घर-दफ्तर से जुड़ी चिंता की वजह से तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐस में हो सकता है कि आपके ख़राब मूड की वजह से आपको बनाते और खाते समय वैसी खुशी महसूस नहीं हो रही जैसे, पहले हो रही थी।

जो व्यक्ति अपने घरवालों या अपने स्वयं के लिए खाना पकाता है, वह भोजन को खाने वाले लोगों के लिए अपनी भावनाओं को भी उसमें उतार देता है। यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के हाथ का बना खाना खाता है, तो उसे खुशी मिलती है।

इसीलिए, सलाह दी जाती है कि , रसोई में भोजन पकाते समय खुश रहें और अच्छे मूड में ही कूक करें। इस तरह लॉकडाउन में आप अपने परिवार के साथ खुशियां बांट सकेंगे और भोजन का पूरा पोषण आपके बच्चों और परिवार के सदस्यों को मिल सकेगा।

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