सेलिब्रिटी डायटीशियन रूजुता दिवेकर से जानें बच्‍चों के लिए हेल्‍दी ईटिंग टिप्‍स

रूजुता दिवेकर सेलिब्रिटी डायटीशियन हैं। उनकी खासियत ये है कि वे ट्रेडिशनल मेथड और डायट को ही हेल्थ सही मानती हैं, आइए जानते हैं उनसे बच्चों के लिए कुछ हेल्दी ईटिंग टिप्स इस वीडियो में।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : May 15, 2019 6:24 PM IST

रूजुता दिवेकर सेलिब्रिटी डायटीशियन हैं। उनकी खासियत ये है कि वे ट्रेडिशनल मेथड और डायट को ही हेल्‍थ सही मानती हैं। इस श्रृंखला में वे हर बार एक नया वीडियो लेकर आती हैं, जिसमें वे बच्‍चों और बड़ो के लिए कुछ डायट और फि‍टनेस के टिप्‍स देती हैं। ऐसे ही एक वीडियो में वे आज बता रही हैं बच्‍चों के लिए हेल्‍दी ईटिंग टिप्‍स।

हेल्‍दी ईटिंग हेबिट्स – इस वीडियो में रूजुता खुद जमीन पर बैठी हैं और दर्शकों को बता रहीं हैं कि आहार के साथ ही उसे ग्रहण करने का तरीका, नियम और समय भी बहुत महत्‍वपूर्ण है। वे शुरू से ही जंक और पैकेज्‍ड फूड के लिए मना करती रही हैं। इस बार वे उन ट्रेडीशन्‍स को भी मना कर रहीं हैं जो भारतीय परिवारों ने विदेशों से ग्रहण किए।

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नीचे बैठकर खाओ – रूजुता बच्‍चों की सही ग्रोथ के लिए नीचे बैठकर खाने की सलाह देती हैं। इसके लिए वे चाहती हैं कि जो भी बच्‍चों को खाना खिला रहा है वह खुद भी जमीन पर बैठे और संभव हो तो जमीन पर बैठकर ही खाना खाए। जमीन पर बैठना सभी की पेल्विक हेल्‍थ के लिए बेहतर माना जाता है। जिससे कब्‍ज जैसी समस्‍याएं नहीं होती।

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प्रोटीन की कहानियां – अकसर मांएं बच्‍चों को प्रोटीन और विटामिन की कहानियां सुना-सुना कर पका देती हैं। वे दाल का उदाहरण देकर समझाती हैं कि पेरेंट्स बच्‍चों के पीछे पड़े रहते हैं कि वे अगर दाल नहीं खाएंगे तो उन्‍हें प्रोटीन नहीं मिलेगा। इस तरह की कहानियां सुनाकर हम बच्‍चों में प्रोटीन नहीं बढ़ा रहे बल्कि उसे कंज्‍यूमर बना रहे हैं। इसकी बजाए बच्‍चे की सेहत पर ध्‍यान दिया जाए।

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90 मिनट का खेल – बॉडी में प्रोटीन और केल्शियम ग्रहण करने के साथ ही उसका अवशोषण भी जरूरी है। खाकर बैठ जाने से यह संभव नहीं है। इसलिए वे कहती हैं कि बच्‍चों को कम से कम दिन भर में 90 मिनट खेलने की अनुमति होनी चाहिए। ये वे खेल हों जिन्‍हें वे अपने दोस्‍तों के साथ घर से बाहर खुले मैदान में खेलें और जिनमें शारीरिक उर्जा खर्च हो।

दूध पीना है कि नहीं – दूध के बारे में ज्‍यादातर मांओं को शिकायत होती है कि उनके बच्‍चे दूध नहीं पीते। इसके लिए वे उसमें तरह-तरह के पाउडर मिलाती हैं ताकि दूध का स्‍वाद बढ़ जाए और बच्‍चा दूध पिएं। रूजुता इस आदत को छोड़ने की सलाह देती हैं और कहती हैं कि बच्‍चे को कुछ भी जबरदस्‍ती न खिलाया पिलाया जाए। अगर उसका दूध पीने का मन है, तभी दूध दिया जाए। दूध में किसी तरह के पाउडर मिलाने को तो वे और भी नुकसानदायक मानती हैं। दूध वह होना चाहिए जिसे अगर उबाला न जाए तो वह खराब हो जाए। यह इसके शुद्ध होने का प्रमाण है। टेट्रा पैक में मिलने वाला दूध किसी के लिए भी सही नहीं है। साथ ही फुल क्रीम दूध पीने पर ही हमें दूध का पूरा पोषण मिल पाता है।

हलवा, लड्डू भी हैं पौष्टिक – एक बाजार चल पड़ा है जिसमें घर में बनने वाला पारंपरिक भोजन पौष्टिक नहीं माना जा रहा, जबकि रुजुता मानती हैं कि पारंपरिक फूड बाहर मिलने वाले फूड से ज्‍यादा पौष्टिक है। बच्‍चों को अपने शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन और विटामिन घर में बनाए गए लड्डू और हलवे से भी मिल सकते हैं। इन्‍हें खाने दें।

टीवी देखते हुए खाना न खिलाएं – अब यह एक आदत ही बन गई है कि लोग डिनर के वक्‍त टीवी ऑन कर लेते हैं। पर वे मानती हैं कि इस तरह हम भोजन का पूरा पोषण नहीं ले पाते। इसलिए बच्‍चों को भी यह आदत डालें कि वे टीवी देखते हुए खाना न खाएं।

समय पर सोना है बहुत जरूरी – जो बच्चे समय से नहीं सोते उनकी लर्निंग, सोशल एबिलिटी प्रभावित होती है। सोने का टाइम निश्चित होना बहुत जरूरी है। आठ से दस साल तक के बच्‍चों को साढ़े नौ बजे तक सो जाना चाहिए। जबकि टीनएजर्स बच्‍चे साढ़े दस बजे तक अपना काम कर सकते हैं। ग्‍यारह बजे के बाद जागना किसी के लिए भी सही नहीं है।

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