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गर्मी का तापमान अब बढ़ने लगा है उसका असर शरीर पर भी पड़ेंगा। गर्मी के मौसम में हेल्थ केयर की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। गर्मी का तापमान जैसे-जैसे बढ़ता जाता है इंसान के शरीर पर उसका असर बढ़ता जाता है। गर्मी के मौसम का असर उन लोगों में बहुत ज्यादा होता है जो किसी भी तरह की विटामिन की कमी से परेशान रहते हैं। विटामिन की कमी किसी भी मौसम में आपको परेशान कर सकती है लेकिन गर्मी के मौसम में यह ज्यादा परेशानी की बात होती है। गर्मी का तापमान बढ़ रहा है तो आपको अपने खान-पान पर भी ध्यान बढ़ा देना चाहिए। आइए जानते हैं गर्मी के मौसम में कौन सी विटामिन की कमी आपको ज्यादा परेशान कर सकती है।
विटामिन ए आंखों के लिए बहुत जरूरी होता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगों जैसे त्वचा,बाल, नाखून, दांत, मसूड़ा और हड्डी को सामान्य रूप में बनाए रखने में मदद करता है। विटामिन ए की कमी से ज्यादातर आंखों की बीमारियां होती हैं, जैसे रतौंधी, आंख के सफेद हिस्से में धब्बे। यह रक्त में कैल्शियम का स्तर बनाए रखने में भी मदद करती है और हड्डियों को मजबूत करती है।
शरीर में विटामिन ए की कमी न होने के लिए चुकंदर, गाजर, पनीर, दूध, टमाटर, हरी सब्जियां, पीले रंग के फल खाने चाहिए।
विटामिन सी मानव शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक है। यह एस्कॉर्बिक अम्ल होता है जो कि हर तरह के सिट्रस फल में जैसे, नींबू, संतरा, अमरूद, मौसमी आदि में पाया जाता है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी नामक रोग हो सकता है, जिसमें शरीर में थकान, मासंपेशियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द, मसूढ़ों से खून आना जैसी दिक्कतें हो जाती हैं। विटामिन सी की कमी से शरीर छोटी छोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी खो देता है।
विटामिन बी-12 के लिए इंजेक्शन या दवा ले रहे हैं तो आपको इन बातों को जरूर जानना चाहिए।
विटामिन सी खट्टे रसदार फल जैसे आंवला, नारंगी, नींबू, संतरा, बेर, कटहल, पुदीना, अंगूर, टमाटर, अमरूद, सेब, दूध, चुकंदर और पालक विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा दालों में भी विटामिन सी पाया जाता है।
विटामिन बी हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन, डीएनए को बनाने में सहायता करता है। इसके कई काम्पलेक्स होते हैं, बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, बी7 और बी12। यह बुद्धि, रीढ़ की हड्डी और नसों के कुछ तत्वों को बनाने में मदद करता है। लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण भी इसी से होता है। इसकी कमी से बेरी बेरी, त्वचा की बीमारियां, एनीमिया, मंदबुद्धि जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी आम बात हो जाती है क्योंकि यह विटामिन ज्यादातर जानवरों में पाया जाता है।
विटामिन बी ज्यादातर मांसाहारी पदार्थों जैसे मछली, मीट, अंडा आदि में पाया जाता है। शाकाहारी लोग इसकी आपूर्ति दूध और इससे बनने वाले उत्पादों, जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों के रूप में पाया जाता है।
विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत सूर्य की किरणें हैं। अगर सप्ताह में दो बार दस से पंद्रह मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की पूर्ति हो जाती है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होता जाता है, जो लोग मोटापे जैसी बीमारी से ग्रस्त है उन्हें विटामिन डी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करना चाहिए।
विटामिन-ई कैप्सूल का कैसे इस्तेमाल करें ?
सूर्य विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसके अलावा दूध, अंडे, चिकन, सोयाबीन और मछलियों में भी विटामिन डी पाया जाता है।
विटामिन ई शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाए रखने, शरीर को एलर्जी से बचाए रखने की, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है। इसकी कमी से जनन शक्ति में कमी आ जाती है।
विटामिन ई अंडे, सूखे मेवे, बादाम और अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, शकरकंद में पाया जाता है।
विटामिन डी की कमी को आपके बाल ही बता देते हैं, जानें बालों के लिए कौन से विटामिन हैं जरूरी।
विटामिन K कमी को पूरा करना है तो इन 4 सब्जियों को खाने में शामिल करें।