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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 9, 2019 2:58 PM IST
सोलो के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाती है। साथ ही ऊंचाई के बातावरण में शरीर को ढलने में मदद करती है।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए जब PM मोदी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की खूबसूरती बयां कर रहे थे तब उन्होंने एक ऐसी जड़ी बूटी का जिक्र किया। लद्दाख में पाई जाने वाली इस खास जड़ी बूटी सोलो (Solo herb benefits) के बारे में उन्होंने कहा कि यह किसी भी तरह संजीवनी से कम नहीं है। हालांकि यह वही संजीवनी बूटी नहीं है, जिसका जिक्र रामायण में किया गया है। पर इसके सेहत लाभ को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह (Solo herb benefits) संजीवनी से कम भी नहीं है।
बहुत ऊंचाई वाले पहाड़ों पर जहां सांस लेना मुश्किल होने लगता है, वहां सेहत को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं है। मैदानी इलाकों से जब भी लोग ऐसे ही ऊंचाई वाले क्षेत्र लद्दाख में लोग जाते हैं, तब उन्हें कम से कम 24 घंटे वहां के तापमान के साथ खुद को समायोजित करने में लगते हैं। पर लद्दाख में ही एक ऐसी जड़ी बूटी भी मिलती है, जो शरीर को वहां के तापमान के साथ एडजस्ट करने में मदद करती है। इसका नाम है रोडियोला, जिसे वहां की स्थानीय भाषा में सोलो कहा जाता है।
सोलो के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाती है। साथ ही ऊंचाई के बातावरण में शरीर को ढलने में मदद करती है। इसका सबसे खास गुण है रेडियो-एक्टिविटी से बचाव करना। वैज्ञानिकों ने इस जड़ी-बूटी को 'रोडियोला' नाम दिया है। रोडियोला ठंडे और ऊंचाई वाले जगह पर पाई जाती है। स्थानीय लोग रोडियोला को 'सोलो' कहते हैं और इसकी पत्तियों का सब्जियों में प्रयोग करते हैं। हालांकि लेह स्थित डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एलटीट्यूड रिसर्च (डीआईएचएआर) के शोध से पता चलता है कि रोडियोला का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है।
डीआईएचएआर के निदेशक आर.बी. श्रीवास्तव के अनुसार "रोडियोला एक आश्चर्यजनक पौधा है, जो रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है, कठिन जलवायु की स्थितियों में शरीर को अनुकूल बनाता है और रेडियो एक्टिविटी से बचाव करता है। इस पौधे में सीकोंडरी मेटाबोलाइट्स और फायटोएक्टिव तत्व पाएं जाते हैं, जो विशिष्ट तत्व हैं।
जड़ी बूटी बम या बॉयोकेमिकल लड़ाई से पैदा हुए गामा रेडिएशन के प्रभाव को कम करती है। लेह स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर स्थित कृषि-जानवर शोध प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला में रोडियोला पर एक दशकों से शोध हो रहा है। इस पौधे की एडेप्टोजेनिक क्षमता सैनिकों और कम दवाब और कम आक्सीजन वाले वातावरण में अनुकूल होने में मदद कर सकती है, साथ ही इस पौधे में अवसाद-रोधी और भूख बढ़ाने वाला गुण भी है।
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